नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ताओं के बीच एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजई ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसे मध्यस्थता के लिए अयोग्य करार दिया है। रेजई का यह बयान तब आया है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मात्र 24 घंटों के भीतर दो बार पाकिस्तान का दौरा किया, जिससे कयास लगाए जा रहे थे कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच सेतु का काम कर सकता है।
पाकिस्तान अमेरिका की तरफ ज्यादा झुकाव
ईरानी नेता इब्राहिम रेजई ने कहा कि पाकिस्तान भले ही ईरान का मित्र राष्ट्र है लेकिन वह अमेरिका और विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रम्प के हितों के प्रति अधिक झुकाव रखता है। रेजई के अनुसार, पाकिस्तान ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ बोलने से बचता है, जिसके कारण उसे एक ‘तटस्थ मध्यस्थ’ के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक प्रभावी मध्यस्थ वही हो सकता है जो दोनों पक्षों के प्रति समान रूप से निष्पक्ष रहे, जबकि पाकिस्तान की भूमिका हमेशा से एक ही पक्ष की ओर झुकी हुई प्रतीत होती है।
پاکستان دوست و همسایه خوب ماست اما واسطه مناسبی جهت مذاکرات نیست و اعتبار لازم را برای واسطهگری ندارد. آنها همیشه مصلحت ترامپ را در نظر میگیرند و برخلاف میل آمریکاییها حرفی نمیزنند بطور مثال حاضر نیستند به دنیا بگویند که آمریکا ابتدا پیشنهاد پاکستان را پذیرفت اما بعد زیر حرفش…
— ابراهیم رضایی (@EbrahimRezaei14) April 26, 2026
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को विनाशकारी परिणामों की चेतावनी दी है। फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रम्प ने कहा कि ईरान के पास युद्ध समाप्त करने और सीजफायर पर सहमत होने के लिए अब बहुत कम वक्त बचा है। ट्रम्प ने एक तरह से ‘तीन दिन’ का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि ईरान समझौता नहीं करता है, तो उसकी तेल पाइपलाइनों में विस्फोट हो सकता है।



