नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के ‘फारसी भाषा एवं मध्य एशिया अध्ययन केंद्र’ में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य “अलीशेर नवोई की वैज्ञानिक एवं रचनात्मक विरासत का विश्व सभ्यता में स्थान” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र प्रतियोगिता के मेधावी विजेताओं को सम्मानित करना था।
सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग का संगम
इस कार्यक्रम में भारत में उज्बेकिस्तान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय मीडिया प्रतिनिधि, विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रख्यात विद्वान तथा उज्बेकिस्तान और दक्षिण एशियाई देशों के विजेता प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की। समारोह के दौरान, विजेताओं को विशेष प्रमाणपत्र, स्मृति-चिह्न और मूल्यवान उपहार प्रदान किए गए। ये पुरस्कार दूतावास के कौंसल तथा कार्यक्रम के सह-आयोजक एवं केंद्र के प्रमुख अख़लाक अहमद अहन द्वारा संयुक्त रूप से दिए गए।
विजेताओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन
समारोह में उज्बेकिस्तान के प्रतिभागियों ने विभिन्न श्रेणियों में अपनी मेधा का लोहा मनवाया और शीर्ष स्थान प्राप्त किए। सम्मानित होने वाले प्रमुख प्रतिभागियों में शामिल हैं:
- दिलराबो उरालोवा: “अलीशेर नवोई के साहित्य के आधुनिक अध्ययन और शिक्षा में भूमिका” श्रेणी
- मावलुदा अज़ीमोवा: “सांस्कृतिक प्रभाव” श्रेणी
- रुस्तम पर्दाबोएव: “सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विज्ञान का समन्वय” श्रेणी
- बिनाफ्शा बाज़ारोवा: “रचनाओं के अनुवाद और व्याख्या” श्रेणी
- इरोदा अहमदोवा: “शैक्षिक महत्व” श्रेणी
इसके अतिरिक्त, दिलफरूज शानियाजोवा को प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर विशेष सम्मान से नवाजा गया।
भविष्य की राह: सांस्कृतिक संबंधों का सुदृढ़ीकरण
यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उज्बेकिस्तान के युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और रचनाकारों की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रमाण है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि महान विचारक अलीशेर नवोई की रचनात्मक विरासत न केवल उज्बेक समाज, बल्कि संपूर्ण विश्व सभ्यता के लिए स्थायी महत्व रखती है।
यह आयोजन भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। इस सम्मेलन ने भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाओं और द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक ठोस आधार तैयार कर दिया है।



