भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र बदल रहा, युवा और जेन जी के लिए नए अवसर: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हैदराबाद, तेलंगाना में स्काईरूट इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया। इस माैके पर उन्होंने स्काईरूट के पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-I का अनावरण भी किया। इसकी 300 किलोग्राम तक उपग्रहों को कक्षा में प्रक्षेपित करने की क्षमता है

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दिल्ली:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र बदल रहा, युवा और जेन जी के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। पिछले 6 से 7 सालों में भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र बड़े बदलावों से गुजर रहा है और यह अब खुला, सहयोगी और नवाचार से प्रेरित अर्थतंत्र बन गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हैदराबाद, तेलंगाना में स्काईरूट इन्फिनिटी कैंपस के उद्घाटन अवसर पर सह बात कही।

देश के युवाओं के लिए अवसर

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने से देश के युवा खासकर ‘जेन जी यूथ’ को भरपूर फायदा उठाने के अवसर मिले हैं। भारत के पास अंतरिक्ष क्षेत्र में क्षमताएं हैं और यह क्षमताएं केवल कुछ ही देश के पास हैं। हमारे पास कुशल इंजीनियर, उच्च गुणवत्ता उत्पादन अर्थतंत्र और विश्व की बेहतरीन प्रक्षेपण स्थल हैं। साथ ही नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला माइंड सेट भी है।

स्काई रूट का इंफिनिटी कैंपस भारत की नई सोच

भारत की युवा शक्ति को नवाचार और जोखिम उठाने वाली क्षमता तथा उद्यमिता से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि इसके चलते आज विविध क्षेत्र में भारत नई बुलंदियां छू रहा है। स्काई रूट का इंफिनिटी कैंपस भारत की नई सोच नवाचार और युवा शक्ति का प्रतिबिंब है।

पीएम ने स्काई रूट के प्रथम ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एक का किया अनावरण

उन्होंने ने स्काई रूट के प्रथम ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एक का अनावरण भी किया। इसमें उपग्रह को कक्षा में प्रक्षेपित करने की क्षमता है। इस अत्याधुनिक केंद्र में बहु प्रक्षेपण वाहनों के डिजाइन विकास एकीकरण और प्रशिक्षण के लिए लगभग 20 हजार वर्ग फुट का कार्य क्षेत्र होगा तथा हर महीने का एक कक्षीय रॉकेट बनाने की क्षमता होगी।

दशकों तक ‘इसरो’ ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को दी नई उड़ान

अंतरिक्ष के क्षेत्र में कार्य करने वाली सरकारी एजेंसी ‘इसरो’ की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक संस्था ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नई उड़ान दी है। उसने विश्वसनीयता, क्षमता और अपने काम से हर प्रकार से भारत की अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष प्रतिभा दुनिया भर में एक मजबूत पहचान बना रही है।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से आकर्षित हो रहे वैश्विक नवाचार वाले संस्थान

वैश्विक नवाचार वाले संस्थान भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। दुनिया भर में छोटे उपग्रह की मांग लगातार बढ़ रही है और अंतरिक्ष को अब एक रणनीतिक एसेट के तौर पर पहचाना जा रहा है। आने वाले सालों में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था कई गुना बढ़ाने वाली है। यह भारत के युवाओं के लिए एक बड़ा मौका है।

उल्लेखनीय है कि स्काई रूट भारत की अग्रणी निजी कंपनी बनकर उभरी है। इसकी स्थापना पवन चंदना और भरत ढाका ने की है। दोनों भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के पूर्व छात्र और इसरो के पूर्व वैज्ञानिक हैं और अब उद्यमी बन गए हैं। नवंबर 2022 में स्काई रूट ने अपना सब ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस लॉन्च किया। इससे वह अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाली पहली भारतीय निजी कंपनी बन गई।

अंतरिक्ष यात्रा सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई थी

मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई थी, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि देश की महत्वाकांक्षाएं कभी सीमित नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि साइकिल पर रॉकेट के पुर्जे ढोने से लेकर दुनिया के सबसे विश्वसनीय प्रक्षेपण यान विकसित करने तक, भारत ने साबित कर दिया है कि सपनों की ऊंचाई संसाधनों से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प से तय होती है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इसरो ने दशकों से भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नए पंख दिए हैं। उन्‍होंने इस बात पर बल दिया है कि विश्वसनीयता, क्षमता और मूल्य ने इस क्षेत्र में भारत की विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

बदलते समय के बारे में चर्चा करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार स्पष्ट है, क्योंकि यह संचार, कृषि, समुद्री निगरानी, शहरी योजना, मौसम पूर्वानुमान और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बन गया है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए गए, सरकार ने इसे निजी नवाचार के लिए खोल दिया और एक नई अंतरिक्ष नीति तैयार की। मोदी ने यह भी कहा कि स्टार्टअप उद्यमों और उद्योगों को नवाचार से जोड़ने के प्रयास किए गए और स्टार्टअप उद्यमों को इसरो की सुविधाएं और तकनीक प्रदान करने के लिए इन-स्‍पेस की स्थापना की गई। प्रधानमंत्री ने कहा, “केवल पिछले छह-सात वर्षों में, भारत ने अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को एक खुले, सहकारी और नवाचार-संचालित इको-सिस्‍टम में बदल दिया है।” उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्रम इसी परिवर्तन का प्रतिबिंब है।

300 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप नई उम्मीदें दे रहे हैं

इस बात पर जोर देते हुए कि भारत के युवा हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हैं और हर अवसर का सर्वोत्तम इस्‍तेमाल करते हैं। मोदी ने कहा कि जब सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को खोला, तो देश के युवा, विशेषकर जेन-जी पीढ़ी, इसका पूरा लाभ उठाने के लिए आगे आए। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज 300 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप भारत के अंतरिक्ष भविष्य को नई उम्मीदें दे रहे हैं। इसके बाद उन्‍होंने कहा कि इनमें से अधिकतर स्टार्टअप छोटी टीमों, कभी दो लोग, कभी पांच लोग, कभी एक छोटे से किराए के कमरे में, सीमित संसाधनों के साथ, लेकिन नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के दृढ़ संकल्प के साथ शुरू हुए थे। प्रधानमंत्री ने ध्‍यान दिलाते हुए कहा, “इसी भावना ने भारत में निजी अंतरिक्ष क्रांति को जन्म दिया है।” उन्होंने कहा कि जेन-जी इंजीनियर, डिजाइनर, कोडर और वैज्ञानिक नई तकनीकों का निर्माण कर रहे हैं, चाहे वह प्रोपल्‍शन प्रणाली हो, मिश्रित सामग्री हो, रॉकेट चरण हों या उपग्रह प्लेटफॉर्म हों। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के युवा ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जिनकी कुछ साल पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि भारत की निजी अंतरिक्ष प्रतिभा दुनिया भर में एक अलग पहचान बना रही है। उन्‍होंने यह भी कहा कि आज, वैश्विक निवेशकों के लिए, भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक आकर्षक गंतव्य बन रहा है।

छोटे उपग्रहों की मांग लगातार बढ़ रही

दुनिया भर में छोटे उपग्रहों की मांग लगातार बढ़ रही है और प्रक्षेपणों की संख्‍या में भी वृद्धि हो रही है, इस पर जोर देते हुए श्री मोदी ने कहा कि नई कंपनियां उपग्रह सेवाएं प्रदान करने के लिए इस क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरिक्ष अब एक रणनीतिक परिसंपत्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था कई गुना बढ़ेगी। उन्‍होंने कहा कि यह भारत के युवाओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर है।

2,00,000 वर्ग फुट में फैला स्काईरूट इन्फिनिटी कैम्पस

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का स्टार्टअप उद्योग यानी स्काईरूट इन्फिनिटी कैम्पस एक अत्याधुनिक केंद्र है, जिसमें लगभग 2,00,000 वर्ग फुट का कार्यक्षेत्र है और बहु-प्रक्षेपण वाहनों के डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण के लिए हर महीने एक कक्षीय रॉकेट बनाने में सक्षम है।

स्काईरूट भारत की अग्रणी निजी अंतरिक्ष कंपनी है, जिसकी स्थापना पवन चंदना और भरत ढाका ने की है, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के पूर्व-छात्र और इसरो के पूर्व वैज्ञानिक हैं और अब उद्यमी बन गए हैं। नवंबर 2022 में, स्काईरूट ने अपना सब-ऑर्बिटल रॉकेट, विक्रम-एस, लॉन्च किया, जिससे वह अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाली पहली भारतीय निजी कंपनी बन गई।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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