चेन्नई/मुंबई: भारत में बंदरगाहों की सुरक्षा को और अधिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने एक अहम कदम उठाया है। देश के प्रमुख बंदरगाहों पर तैनात निजी सुरक्षा कर्मियों के लिए CISF ने एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल भारत के हाइब्रिड बंदरगाह सुरक्षा मॉडल को प्रभावी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास है।
दो बंदरगाहों से एक साथ हुई शुरुआत
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA), मुंबई और चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी (CHPA) में एक साथ पायलट आधार पर की गई है। इसका उद्देश्य निजी सुरक्षा कर्मियों की दक्षता बढ़ाना, सुरक्षा प्रक्रियाओं में एकरूपता लाना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मानकों जैसे कि ISPS (International Ship and Port Facility Security) को पूरी तरह लागू करना है।
बढ़ती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच अहम पहल
हालिया वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और समुद्री खतरों को देखते हुए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत प्रासंगिक बन गया है। इस साल की शुरुआत में जब देश के कई बंदरगाहों पर MARSEC स्तर 2 लागू किया गया था, तब उच्च सुरक्षा और बेहतर समन्वय की आवश्यकता स्पष्ट रूप से महसूस की गई थी। ऐसे में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदरगाह सुरक्षा में गुणवत्ता और तत्परता दोनों को नई दिशा देगा।
पाठ्यक्रम की विशेषताएं
दो सप्ताह तक चलने वाला यह ‘बंदरगाह-सुविधा सुरक्षा पाठ्यक्रम’ समुद्री मंत्रालय, सीमा शुल्क विभाग, पोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन जैसे विभिन्न हितधारकों के सहयोग से तैयार किया गया है। इसमें कानूनी ढांचे, आधुनिक सुरक्षा तकनीकों, आपातकालीन प्रतिक्रिया, खतरे की पहचान और ISPS संहिता की गहराई से जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण में शामिल प्रमुख बंदरगाह
प्रथम चरण में JNPA प्रशिक्षण केंद्र, मुंबई में जेएनपीए शेवा, डीपीए कांडला और एमपीए मुंबई से जुड़े 40 निजी सुरक्षा कर्मियों ने प्रशिक्षण लिया है, जबकि CHPA प्रशिक्षण केंद्र, चेन्नई में न्यू मैंगलोर पोर्ट, कामराजर पोर्ट, चेन्नई पोर्ट और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट से 26 कर्मी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
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प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं
उद्घाटन समारोह में चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी के अध्यक्ष सुनील पालीवाल (IAS) ने इसे बंदरगाह सुरक्षा में एक ऐतिहासिक कदम करार दिया है। वहीं, CISF के महानिरीक्षक सरवनन ने कहा है कि बंदरगाहों के जटिल माहौल को देखते हुए यह प्रशिक्षण कर्मियों को पेशेवर और आत्मविश्वासी बनाता है, जिससे हमारे व्यापारिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूती मिलती है।
दरअसल, CISF की योजना इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को आने वाले महीनों में अन्य छोटे एवं मध्यम स्तर के बंदरगाहों तक विस्तारित करने की है, जिससे समूचे भारत में एक समान और मानकीकृत सुरक्षा तंत्र विकसित किया जा सके। भारत में समुद्री व्यापार के बढ़ते महत्व को ध्यान में रखते हुए CISF की यह पहल न केवल बंदरगाहों की सुरक्षा को एक नई ऊंचाई देगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की समुद्री सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को भी मजबूती प्रदान करेगी।



