ग्रीन स्टील पर भारत का जोर, बनेगा विश्वगुरु

ग्रीन स्टील, मतलब जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल किए बिना इस्ताप का उत्पादन..., केंद्र सरकार पर्यावरण अनुकूल तरीकों पर काम कर रही है। आइए, आंकड़ों में इसे समझते हैं।

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नई दिल्ली: पर्यावरण को बचाने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में एक कदम में है ‘ग्रीन स्टील वर्गीकरण, Green Steel Classification’। इसका मतलब है कि ग्रीन स्टील, यानी कम कार्बन उत्सर्जन से अधिकतम स्टील का उत्पादन। इसका मकसद Renewable Energy, नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाकर हरित इस्पात का उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने का ढांचा विकसित करना है। विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श और विचार-विमर्श की श्रृंखला के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया था।
ग्रीन स्टील प्रमाण पत्र उन संयंत्रों को जारी किए जाएंगे जो भी आवेदन करते हैं। हरित इस्पात के वर्गीकरण के अनुसार, कार्बन उत्सर्जन के स्तर को पूरा करते हैं। इस्पात मंत्रालय के तहत एक प्रशिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय माध्यमिक इस्पात प्रौद्योगिकी संस्थान (NISST), मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV) के साथ इस्पात के लिए हरित इस्पात प्रमाण पत्र और स्टार रेटिंग जारी करने के लिए नोडल एजेंसी है। अब तक 39 लौह और इस्पात उत्पादकों ने हरित इस्पात प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है।

बढ़ रही स्टील उत्पादन की क्षमता (मिलियन टन में)

 सालक्षमताउत्पादन
2020-21143.91103.54
2021-22154.06120.29
2022-23161.30127.20
2023-24179.51144.30
2024-25200.33152.18

स्रोत: संयुक्त संयंत्र समिति 

स्टील इम्पोर्ट कम करने के लिए उठाए गए कदम

  1. सरकारी खरीद के लिए ‘मेड इन इंडिया’ स्टील को प्रोत्साहन देने के लिए डोमेस्टिक लेवल पर निर्मित लौह एवं इस्पात उत्पाद (डीएमआई एवं एसपी) नीति का कार्यान्वयन।
  2. देश के भीतर मूल्यवर्धित इस्पात के विनिर्माण को प्रोत्साहन देने और पूंजी निवेश को आकर्षित करके आयात को कम करने के लिए विशेष इस्पात के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की शुरू।
  3. घरेलू इस्पात उद्योग को आयात पर विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने के लिए आयात की निगरानी हेतु इस्पात आयात निगरानी प्रणाली (एसआईएमएस) का पुनर्गठन।
  4. इस्पात गुणवत्ता नियंत्रण आदेश लागू करना, जिससे घरेलू बाजार में घटिया व दोषपूर्ण इस्पात उत्पादों के साथ-साथ आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सके, ताकि उद्योग, उपयोगकर्ताओं और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण इस्पात की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

राष्ट्रीय इस्पात नीति, 2017 में घरेलू मांग, निर्यात और विभिन्न अन्य कारकों में वृद्धि के अनुमानों के आधार पर वर्ष 2030 तक 300 मिलियन टन (एमटी) कच्चे इस्पात की क्षमता और 255 एमटी उत्पादन की परिकल्पना की गई है। वर्ष 2024-25 के लिए कच्चे इस्पात की क्षमता और उत्पादन क्रमशः 200.33 मिलियन टन और 152.18 मिलियन टन थे।

तैयार इस्पात आयात (एमएनटी)

सालचीन से आयातकुल आयातचीन का हिस्सा (फीसद में)
2023-242.698.3232.3
2024-252.539.5526.5
अप्रैल-जून2025-26*0.311.3822.4

स्रोत: संयुक्त संयंत्र समिति (जेपीसी); *अनंतिम; एमएनटी=मिलियन टन

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