नई दिल्ली: प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए भारत ने एक अनूठा कदम उठाया है। चेन्नई में बन रहा लाइट हाउस मेट्रो स्टेशन देश का पहला सुनामी प्रूफ स्टेशन (Tsunami Proof Metro Station ) होगा, जो समुद्री लहरों से सुरक्षित रहेगा। हाल ही में रूस के कमचटका प्रायद्वीप के पास आए 8.8 तीव्रता के भूकंप ने प्रशांत क्षेत्र में सुनामी की तबाही मचाई, जिससे रूस और जापान में 4 मीटर ऊंची लहरें उठीं। इस आपदा ने तटीय इलाकों को नुकसान पहुंचाया और वैश्विक स्तर पर सुनामी से बचाव की जरूरत को उजागर किया। भारत इस दिशा में पहले से तैयार है।
लाइट हाउस मेट्रो स्टेशन: सुनामी से सुरक्षा की गारंटी
चेन्नई के मरीना बीच के पास बन रहा लाइट हाउस मेट्रो स्टेशन विशेष यूरोपीय तकनीक से डिजाइन किया गया है। इसमें ऑटोमेटिक फ्लड गेट्स लगाए गए हैं, जो समुद्र का जलस्तर बढ़ने पर स्वचालित रूप से बंद हो जाते हैं, जिससे स्टेशन में पानी का प्रवेश असंभव है। 2004 की सुनामी के बाद चेन्नई में सुरक्षा को लेकर उठी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह स्टेशन तैयार किया जा रहा है। यह आपदा प्रबंधन में भारत की तकनीकी प्रगति का प्रतीक है।
स्टेशन की खासियत और आधुनिक डिजाइन
लाइट हाउस मेट्रो स्टेशन 414 मीटर लंबा और 35 मीटर चौड़ा है, जो इसे चेन्नई सेंट्रल मेट्रो स्टेशन से भी बड़ा बनाता है। इसमें 6 ट्रैक और 12 ट्रेनों के लिए पार्किंग की सुविधा है। प्लेटफॉर्म को कॉनकोर्स लेवल से ऊपर बनाया गया है, जिससे पानी का खतरा कम हो। फ्लेमिंगो नामक टनल बोरिंग मशीन 2 किलोमीटर लंबी सुरंग बना रही है, जो स्टेशन को कचहरी रोड और थिरुमलाई मेट्रो स्टेशन से जोड़ेगी। चेन्नई मेट्रो के फेज-2 के तहत यह कॉरिडोर 2025-2028 तक शुरू होगा।
वैश्विक आपदा प्रबंधन में भारत की पहल
जब रूस और जापान जैसे देश सुनामी की मार झेल रहे हैं, भारत का यह स्टेशन आपदा प्रबंधन में एक मिसाल बनेगा। यह न केवल चेन्नई के नागरिकों को सुरक्षित रखेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रेरणा देगा।



