नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। रेलवे का कहना है कि अब 60 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों और 45 वर्ष या उससे अधिक आयु की सभी महिलाओं को उपलब्धता के आधार पर स्वतः निचली बर्थ दी जाएगी, भले ही उन्होंने यह विकल्प टिकट बुकिंग के समय नहीं चुना हो। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी निचली बर्थ देने में प्राथमिकता मिलेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों की यात्रा और भी सुरक्षित, आरामदायक और सुविधाजनक बन सके।
कोच के हिसाब से विशेष कोटा
रेलवे ने इन यात्रियों के लिए कोच के हिसाब से विशेष कोटा भी तय किया है। स्लीपर कोच में हर डिब्बे में 6 से 7 निचली बर्थ, 3एसी में 4 से 5, और 2एसी में 3 से 4 निचली बर्थ का संयुक्त कोटा रखा गया है। इसका मतलब है कि वरिष्ठ नागरिकों, 45+ महिलाओं और गर्भवती यात्रियों को पहले निचली बर्थ दी जाएगी।
दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था
दिव्यांगजनों के लिए भी रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में उनके लिए अलग कोटा तय है। स्लीपर और 3एसी/3ई में चार-चार बर्थ (दो निचली और दो मध्यम) तथा सेकंड सीटिंग और चेयर कार में चार सीटों का कोटा दिव्यांगजन और उनके परिचारकों के लिए आरक्षित है। यदि ट्रेन में कोई निचली बर्थ खाली रह जाती है, तो उसे सबसे पहले वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग यात्रियों और गर्भवती महिलाओं को ही दिया जाएगा।
दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग कोच
इसके अलावा रेलवे ने कोचों के डिजाइन में भी बड़े बदलाव किए हैं ताकि यात्रा और भी आरामदायक हो सके। लगभग सभी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग कोच लगाए गए हैं, जिनमें चौड़े दरवाजे, चौड़ी बर्थ, बड़ा शौचालय, व्हीलचेयर रखने की जगह और शौचालय में सहारा देने वाली ग्रैब रेल लगाई गई हैं। वॉशबेसिन और दर्पण भी ऐसे स्तर पर लगाए गए हैं कि दिव्यांग यात्री आसानी से उनका उपयोग कर सकें।
दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए खास इंतजाम
दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए भी रेलवे ने खास इंतजाम किए हैं। कोचों में ब्रेल साइनेज लगाए गए हैं, जिससे वे आसानी से सीट और सुविधाओं की पहचान कर सकें।
यह भी पढ़ेंः केंद्र सरकार लैंड पूलिंग नीति की अवैध शर्तें हटाए
अमृत भारत और वंदे भारत में खास सुविधा
नए अमृत भारत और वंदे भारत ट्रेनों में भी दिव्यांगजनों का विशेष ध्यान रखा गया है। वंदे भारत ट्रेनों के पहले और आखिरी डिब्बों में व्हीलचेयर के लिए पर्याप्त जगह, बड़ा शौचालय और आसानी से चढ़ने-उतरने के लिए मॉड्यूलर रैंप की सुविधा है। इससे कम गतिशीलता वाले यात्रियों को काफी राहत मिलती है।



