नई दिल्ली: भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA) ने ‘जनजातीय विकास के लिए CSR उत्कृष्टता का उपयोग’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का समापन हो गया है। यह कार्यक्रम कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। सम्मेलन का उद्देश्य कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility) के माध्यम से सहयोग, नवाचार और समावेशी विकास को बढ़ावा देना था, जिससे जनजातीय समुदायों का सशक्तिकरण हो सके।
जनजातीय विकास पर फोकस
यह सम्मेलन भारत के दूसरे वार्षिक CSR डे के अवसर पर आयोजित किया गया, जो महात्मा गांधी की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसमें सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और सामाजिक संस्थाओं के 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी ने इस बात पर चर्चा की कि CSR रणनीतियों को कैसे जनजातीय विकास और सतत आजीविका से जोड़ा जा सकता है। सम्मेलन की शुरुआत एक सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुई, जिसमें भारत की जनजातीय परंपराओं की झलक दिखाई गई।
DPE सचिव के मोसेस चालई ने दिए दिशा-निर्देश
इस मौके पर लोक उपक्रम विभाग (DPE) के सचिव के. मोसेस चालई ने कहा कि सरकारी उपक्रमों (CPSEs) को जनजातीय समुदायों के बीच लॉन्ग टर्म और स्थायी Corporate Social Responsibility कार्यक्रम चलाने चाहिए। उन्होंने कौशल विकास, उद्यमिता और डिजिटल समावेशन को आत्मनिर्भर जनजातीय अर्थव्यवस्था का आधार बताया।
इसके साथ ही चालई ने CSR पर स्पष्ट लक्ष्य, मापनीय परिणाम और ठोस माइलस्टोन तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने ने कहा कि सभी उपक्रमों को राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और नागरिक संगठनों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, ताकि CSR के जरिए वास्तविक सामाजिक और पर्यावरणीय बदलाव लाए जा सकें।
कॉर्पोरेट कार्य सचिव ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुझाव दिया
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी ने IICA की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह का मंच नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और समुदायों को एक साथ जोड़ता है। उन्होंने एक डिजिटल ‘CSR एक्सचेंज प्लेटफॉर्म’ बनाने का सुझाव दिया, जहां सरकारी और निजी संस्थान CSR परियोजनाओं की जानकारी साझा कर सकें, सहयोग के अवसर पहचान सकें और सफल परियोजनाओं की कहानियां साझा कर सकें।
तकनीक और मैनेजमेंट का योगदान भी जरूरी- DG, IICA
IICA के महानिदेशक एवं सीईओ ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि CSR को केवल आर्थिक योगदान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। CSR का मकसद तकनीकी और प्रबंधकीय विशेषज्ञता देना होना चाहिए, ताकि असली बदलाव गतिविधियों के जरिए आए, न कि केवल धन वितरण से। उन्होंने बताया कि देश के कुछ हिस्सों, विशेषकर पूर्वोत्तर भारत, को अब भी पर्याप्त CSR सहायता नहीं मिलती। इसलिए संतुलित और जरूरत-आधारित CSR निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने CSR में डेटा, एआई और एनालिटिक्स के उपयोग पर जोर दिया, ताकि रियल-टाइम निगरानी और बेहतर परिणाम हासिल हो सकें।
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CSR मानवाधिकारों से जुड़ा प्रयास- UNICEF
UNICEF इंडिया के साझेदारी प्रमुख बो बिस्कजेर ने कहा कि CSR कोई दान नहीं बल्कि परिवर्तन का साधन है। उन्होंने बताया कि CSR के जरिए जनजातीय बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की दिशा में काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि CSR को गरिमा, समानता और समावेशिता को बढ़ावा देना चाहिए।
समापन सत्र और धन्यवाद ज्ञापन
समापन सत्र में IICA की डॉ. गरिमा दाधिच ने बताया कि CSR को रणनीतिक, डेटा-आधारित और तकनीक-संलग्न मॉडल बनाना होगा, ताकि इसका लाभ लंबे समय तक मिले। उन्होंने जनजातीय शिल्प, पारंपरिक उत्पाद और GI टैग्ड वस्तुओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।



