नई दिल्ली: दुश्मन में भारत का सुरक्षा कवच भेद नहीं पाएंगे। वह इसलिए कि डीआरडीओ ने पहला स्वदेशी इंटिग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS) का सफल परीक्षण कर हवाई खतरे को और कम किया है। रविवार को ओडिशा के तट पर यह सफल परीक्षण किया गया। IADWS कई लेयर वाला सिस्टम है।
क्या है खासियत
यह सिस्टम मल्टीलेयर एयर डिफेंस सिस्टम है। खास बात यह है कि इसमें सभी स्वदेशी त्वरित प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने में सक्षम मिसाइलें (क्यूआरएसएएम)। उन्नत अति लघु दूरी वायु रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस) मिसाइलें और एक उच्च शक्ति सहित लेजर आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार (डीईडब्ल्यू) शामिल हैं।
सभी हथियार प्रणाली घटकों को एकीकृत संचालन रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला में विकसित एक केंद्रीकृत कमान व नियंत्रण केंद्र के जरिये नियंत्रित किया जाता है। इस परीक्षण से जुड़े विकास कार्यक्रम की नोडल प्रयोगशाला है। VSHORADS को रिसर्च सेंटर इमारत और डीईडब्ल्यू को सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज ने विकसित किया है।
एक साथ साधे तीन लक्ष्य
उड़ान परीक्षणों के दौरान दो उच्च गति वाले फिक्स्ड विंग मानवरहित हवाई लक्ष्यों और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन सहित तीन अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ साधा गया। खास बात यह है कि इन लक्ष्यों की रफ्तार और ऊंचाई भी अलग-अलग थी। मिसाइल प्रणाली और ड्रोन का पता लगाने व विनाश प्रणाली, हथियार प्रणाली कमान एवं नियंत्रण के साथ-साथ संचार व रडार सहित सभी हथियार प्रणाली घटकों ने त्रुटिरहित रहा। इसकी पुष्टि उड़ान डेटा को कैप्चर करने के लिए एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर द्वारा तैनात रेंज उपकरणों द्वारा की गई। इस परीक्षण का अवलोकन डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों ने किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईएडीडब्ल्यूएस के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योग जगत को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस अनूठे उड़ान परीक्षण ने देश की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता को स्थापित किया है और यह दुश्मन के हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय रक्षा घेरे को सशक्त बनाएगा।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद परीक्षण
पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से तानव के बीच हुए ऑपरेशन सिंदुर के करीब तीन महीने बाद भारत ने यह परीक्षण किया है। अधिकारियों ने परीक्षण को भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा में मील का पत्थर बताया।
गगनयान मिशन के इंटिग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट में इसरो पास
उधर, इसरो ने रविवार को गगनयान मिशन के लिए पहला इंटिग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया। यह टेस्ट पूरी तरह से पैराशूट आधारित सिस्टम की जांच के लिए किया गया ताकि भविष्य में जब अंतरिक्ष यात्री धरती पर लौटें तो उनका कैप्सूल सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतरे। ऐसे सात टेस्ट और किए जाएंगे। टेस्ट में पहले छोटे ड्रोग पैराशूट खोले गए, जिनसे स्पीड कम हुई। बाद में पायलट पैराशूट और फिर तीन बड़े मेन पैराशूट खुले, जिससे कैप्सूल नीचे उतरा।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से इसरो ने वायुसेना, DRDO, नेवी और कोस्टगार्ड के साथ यह परीक्षण किया। चिनूक हेलिकॉप्टर से चार किमी ऊंचाई से क्रू मॉड्यूल को गिराया गया। इस टेस्ट में पहले छोटे पैराशूट खोले गए, जिनकी स्पीड कम हुई तो पायलट पैराशूट और फिर तीन बड़े पैराशूट खुले। उनकी मदद से क्रू मॉड्यूल धीरे-धीरे सुरक्षित ढंग से नीचे उतरा। अब इस टेस्ट के सभी डेटा का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा, जिसके बाद आगे के टेस्ट की योजना बनेगी।



