नई दिल्ली: केंद्र सरकार का कपड़ा मंत्रालय इस वर्ष ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ का आयोजन कर रहा है। यह मौका देश की समृद्ध हस्तकला, पारंपरिक बुनाई की विरासत और बुनकरों के योगदान को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। इस साल यह 11वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है, जो आज 7 अगस्त नई दिल्ली के भारत मंडपम में मनाया जाएगा। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगी। उनके साथ कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और विदेश व कपड़ा राज्यमंत्री पबित्रा मार्घेरिटा भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी, विदेशों से आए खरीदार और देश के अलग-अलग राज्यों से आए करीब 650 बुनकर भी समारोह में हिस्सा लेंगे।
पुरस्कार वितरण
समारोह में देश के बेहतरीन बुनकरों को बड़े पुरस्कार दिए जाएंगे। मसलन; संत कबीर पुरस्कार। यह उन बुनकरों को दिया जाता है जिन्होंने लंबे समय से हथकरघा क्षेत्र में अच्छा काम किया है। इसमें ₹3.5 लाख नकद, सोने का सिक्का, प्रमाणपत्र और शॉल दिया जाता है।
दूसरी तरफ राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन लोगों को दिया जाएगा, जो सुंदर और नए डिजाइन बनाकर इतिहास रच रहे हैं। इसमें ₹2 लाख नकद, प्रमाणपत्र और शॉल मिलता है। इस मौके पर 6 महिलाओं और 1 दिव्यांग बुनकर को इन पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।
क्या-क्या होगा आयोजन में
पुरस्कार पाने वाले बुनकरों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगेगी। NIFT मुंबई द्वारा बनाई गई सुंदर किताब (Coffee Table Book) का विमोचन होगा और बुनकरों के लिए सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाली सहायता डेस्क भी वहां होगी।
हथकरघा का समाज में योगदान
भारत में करीब 35 लाख लोग हथकरघा काम से जुड़े हैं। इनमें 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह उद्योग पर्यावरण के अनुकूल है और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को रोजगार भी देता है।
7 अगस्त को ही क्यों
7 अगस्त 1905 को भारत में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ था, जिसमें लोगों से अपने देश में बने कपड़े और सामान अपनाने की अपील की गई थी। इसी याद में 2015 से हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। पहली बार यह दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई में मनाया था। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस उन हजारों बुनकरों को सलाम करने का दिन है, जो अपनी मेहनत से भारत की संस्कृति को जिंदा रखे हुए हैं। यह दिन हमें अपने पारंपरिक कपड़ों और कारीगरों को सम्मान देने की प्रेरणा देता है।



