नई दिल्ली: नैनो यूरिया और डीएपी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा किसान करें, इसके लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। जागरूकता शिविरों, वेबिनार, क्षेत्रीय प्रदर्शनों, किसान सम्मेलनों और क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्मों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। संबंधित कंपनियां नैनो यूरिया और नैनो डीएपी सहित नैनो उर्वरक प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (पीएमकेएसके) पर उपलब्ध कराती हैं। राज्य सभा में इसकी जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने दी है।
ये पहल की जा रही हैं
- उर्वरक विभाग की ओर से नियमित रूप से जारी मासिक आपूर्ति योजना में नैनो उर्वरकों को शामिल किया गया है।
- भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान के माध्यम से आईसीएआर ने हाल ही में “उर्वरकों (नैनो-उर्वरकों सहित) के कुशल और संतुलित उपयोग” पर राष्ट्रीय अभियान का आयोजन किया।
- पत्तियों पर छिड़काव के माध्यम से नैनो यूरिया जैसे नैनो उर्वरकों के प्रयोग और उपयोग को आसान बनाने के लिए, ‘किसान ड्रोन’ जैसे नवीन छिड़काव विकल्पों और खुदरा दुकानों पर बैटरी चालित स्प्रेयरों के वितरण जैसी पहल की गई हैं। इस उद्देश्य के लिए, ग्राम स्तरीय उद्यमियों के माध्यम से पायलट प्रशिक्षण और कस्टम हायरिंग छिड़काव सेवाओं को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है।
- उर्वरक विभाग ने उर्वरक कंपनियों के सहयोग से देश के सभी 15 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में परामर्श और क्षेत्र स्तरीय प्रदर्शनों के माध्यम से नैनो डीएपी को अपनाने के लिए महा अभियान शुरू किया है। इसके अतिरिक्त उर्वरक विभाग ने उर्वरक कंपनियों के सहयोग से देश के 100 जिलों में नैनो यूरिया प्लस के क्षेत्र स्तरीय प्रदर्शनों और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए भी अभियान शुरू किया है।
नैनो यूरिया
यह एक तरल उर्वरक है जो 20-50 नैनोमीटर के आकार के नैनो-कणों से बना होता है। यह पारंपरिक यूरिया की तुलना में 80% अधिक प्रभावी है। यह पत्तियों के माध्यम से आसानी से अवशोषित हो जाता है और पौधे की वृद्धि और विकास में मदद करता है। पर्यावरण के अनुकूल है और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के लिए बेहतर माना जाता है। यह रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करने में मदद करता है। इसकी 500 मिलीलीटर की बोतल एक बोरी यूरिया के बराबर है।
नैनो डीएपी
यह तरल उर्वरक है जो नाइट्रोजन और फास्फोरस प्रदान करता है। इसमें 8% नाइट्रोजन और 16% फास्फोरस होता है। इसके कणों का आकार 100 नैनोमीटर से कम होता है, जिससे यह पौधों द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाता है। फसलों में नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी को ठीक करने में मदद करता है। यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना फसलों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है। रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करने में मदद करता है। यह फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है। यह किसानों के लिए एक किफायती विकल्प है क्योंकि इसकी कीमत पारंपरिक डीएपी से कम है।
कैसे होगा उपयोग
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी दोनों को पत्तियों पर छिड़काव करके उपयोग किया जाता है। नैनो यूरिया को फसल की बुवाई के 30-35 दिन बाद और रोपाई के 20-25 दिन बाद 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जाता है। नैनो डीएपी को भी इसी तरह से इस्तेमाल किया जाता है। फूल आने से पहले नैनो यूरिया प्लस का छिड़काव अवश्य करें। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया को मिलाकर भी छिड़काव किया जा सकता है।



