नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन सोने और चांदी के दाम को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 1,449 रुपये बढ़कर 1,16,903 रुपये हो गई। इससे पहले यह 1,15,454 रुपये पर ट्रेड कर रही थी। इसी तरह, चांदी के दाम भी 673 रुपये की छलांग लगाते हुए 1,45,060 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए, जो पहले 1,44,387 रुपये पर था।
इस साल सोना ₹41,000, चांदी ₹59,000 रुपये महंगी
इस साल अब तक सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। 31 दिसंबर, 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपये का था, जो अब 1,16,903 रुपये पर पहुंच गया है। यानी करीब 40,741 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। चांदी का हाल भी कुछ ऐसा ही है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलोग्राम चांदी 86,017 रुपये की थी, जो अब 1,45,060 रुपये प्रति किलो हो गई है। इस दौरान 59,043 रुपये का इजाफा दर्ज किया गया। यह बढ़ोतरी निवेशकों के बीच सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश के रूप में देखे जाने का परिणाम है।
₹1.55 लाख तक पहुंच सकता है सोना
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बैंक ने अगले साल तक सोने के लिए 5,000 डॉलर प्रति औंस का टारगेट रखा है। मौजूदा एक्सचेंज रेट के हिसाब से रुपये में यह लगभग 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच सकता है। ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल के डायरेक्टर संदीप रायचुरा ने कहा कि सोना 1,44,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। ये अनुमान केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी, अमेरिकी नीतिगत अनिश्चितताओं और वैश्विक आर्थिक मंदी के डर पर आधारित हैं।
सोने में तेजी के 5 बड़े कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में आगे भी उछाल की संभावना है। यहां हैं प्रमुख 5 कारण-
- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनियाभर के बड़े बैंक डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए अपने खजाने में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं। जब बड़े बैंक लगातार खरीदते हैं, तो बाजार में मांग बनी रहती है और कीमतें ऊपर जाती हैं।
- ‘ट्रम्प फैक्टर’: अमेरिका की नीतियों को लेकर अनिश्चितता है। फेडरल रिजर्व पर दखल की बातें डॉलर-बॉन्ड बाजार को कमजोर करती हैं। इससे निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर रुख करते हैं।
- क्रिप्टो से सोने की ओर रुख: क्रिप्टोकरेंसी में उतार-चढ़ाव और सख्त नियमों के डर से निवेशक सोने में पैसा लगा रहे हैं। भारत में शेयर बाजार से कम रिटर्न ने भी सोने को आकर्षक बना दिया है।
- डीडॉलराइजेशन: कई देश डॉलर का इस्तेमाल कम करके अपने आर्थिक मॉडल बदल रहे हैं। अमेरिका पर कर्ज बढ़ रहा है और डॉलर कमजोर हो रहा है, जिससे सोने में तेजी आ रही है।
- लॉन्ग-टर्म एसेट: सोना कभी पूरी तरह बेकार नहीं होता। यह नष्ट नहीं होता, सीमित मात्रा में उपलब्ध है और महंगाई के समय अपनी कीमत बचा लेता है। लंबे समय में यह ज्यादातर फायदेमंद साबित होता है।
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निवेशकों के लिए सलाहविशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के सीजन में सोने-चांदी की मांग और बढ़ेगी, लेकिन उतार-चढ़ाव का ध्यान रखें। छोटे निवेशकों को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या ईटीएफ पर विचार करना चाहिए। बाजार की निगाहें अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली नीति पर टिकी हैं, जो कीमतों को और प्रभावित कर सकती है।



