नई दिल्ली: अब आधार कार्ड के जरिये होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी। इससे बायोमेट्रिक मिलान एल्गोरिदम में भी सुधार होगा। इसके लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने मंगलवार को भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute-ISI) के साथ संयुक्त अनुसंधान व विकास (आरएंडडी) के लिए एक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य डेटा-संचालित नवाचारों के माध्यम से आधार संचालन की मजबूती, सुरक्षा और विश्वसनीयता को और बढ़ाना है।
इस समझौते पर यूआईडीएआई की उप महानिदेशक (प्रौद्योगिकी केंद्र) तनुश्री देब बर्मा और भारतीय सांख्यिकी संस्थान के प्रमुख प्रो. बीएस दया सागर ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार और भारत सरकार के कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) की अपर सचिव सुश्री पूजा सिंह मंडोल भी उपस्थित थीं।
यूआईडीएआई के सीईओ कुमार ने कहा कि ISI के साथ हमारा सहयोग एडवांस्ड, सिक्योर और सिटिजन-सेंटरिक इनोवेशन के निर्माण की दिशा में अहम कदम है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में अपर सचिव मंडोल ने कहा कि यह साझेदारी सांख्यिकी, प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित नवाचार के क्षेत्र में गहन विशेषज्ञता को एक जगह पर लाती है।
भारतीय सांख्यिकी संस्थान के बारे में
भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थान है। यह सांख्यिकी, गणित, कंप्यूटर विज्ञान और डेटा विज्ञान के क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है, और उच्च-प्रभावी अनुसंधान में इसका एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड है।
आधार कार्ड से धोखाधड़ी
- जालसाज आधार कार्ड से आपनी डिटेल लेकर लोन के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। कई बार इसमें बैंक कर्मचारी की भी साठगांठ सामने आती है।
- ठग कॉल करके खुद को बैंक या यूआईडीएआई का अफसर बताकर मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी नंबर पूछते हैं। इसके शेयर करने के बाद आधार से जुड़े बैंक खाते से पैसे निकल जाते हैं।
- साइबर ठग आधार कार्ड को स्कैन करके क्लोन बना लेते हैं। उसके बाद इसका इस्तेमाल पहचान पत्र के रूप में करते हैं। सिम खरीदने, बैंक अकाउंट खोलने या ई-वॉलेट के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
- कुछ ठग फर्जी आधार केंद्र खोलकर दस्तावेज और बायोमेट्रिक डेटा देते हैं, फिर उस डेटा का इस्तेमला जालसाजी में करते हैं।
आधार से धोखाधड़ी होने पर क्या करें
- UIDAI वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें या टोल-फ्री हेल्पलाइन (1947) पर कॉल करें।
- अपना आधार नंबर, दुरुपयोग का प्रकार और संबंधित डॉक्यूमेंट जैसी जानकारी दें।
- अतिरिक्त सहायता के लिए स्थानीय अधिकारियों या साइबर क्राइम सेल से संपर्क करें।



