रायपुर: बस्तर संभाग और उसके बार्डर तेलंगाना और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली पर माओवादी अंतिम सांसें गिन रहे हैं। फिर भी अभी कुछ जगहों पर यह अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में हैं। बुधवार को नारायणपुर बार्डर पर गढ़चिरौली में जवानों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। वहां के चार माओवादियों को मार गिराया। इनमें तीन महिला और एक पुरुष है। इनकी अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। इनके पास से सुरक्षा बलों को जो उच्च स्तर के हथियार मिले हैं, उसके आधार पर जानकार इनको वहां काम करने वाली माओवादी कंपनी नंबर 10 के माओवादी बता रहे हैं, लेकिन इनकी कम संख्या इस बात पर सवाल भी खड़ा करती है कि यह इस कंपनी के माओवादी नहीं हैं।
कांकेर में दहशत फैलाने की थी कोशिश
करीब तीन साल बाद अभी दो सप्ताह पूर्व माओवादियों ने जन अदालत लगाकर एक ग्रामीण की हत्या कर दी। जन अदालत अर्थात गांव के सभी लोगों को इकट्ठा कर उस व्यक्ति को लाया गया, उसके बाद सबके सामने पुलिस का मुखबिर बताकर हत्या कर दी गयी। माओवादी ऐसा आम लोगों में दहशत पैदा करने के लिए करते हैं। इससे लगभग शांत हो चुके कांकेर के माओवाद क्षेत्र में पुन: दहशत पैदा हो गयी, लेकिन बुधवार को हुई मुठभेड़ के बाद पुन: फोर्स ने अपना दबदबा दिखा दिया।
कोपरशी वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़
पुलिस को सूचना मिली थी कि कोपरशी वन क्षेत्र में माओवादी किसी घटना को अंजाम देने की रणनीति बना रहे हैं। इस सूचना के आधार पर गढ़चिरौली पुलिस की एंटी नक्सल कमांडो फोर्स सी-60 की 19 टुकड़ियां और सीआरपीएफ की क्विक एक्शन टीम की दो इकाइयां उस क्षेत्र में भेजी गईं। लगातार हो रही भारी बारिश के बावजूद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओएरेटिजन्स एम. रमेश के नेतृत्व में टीम बुधवार सुबह जंगल में पहुंची। तलाशी अभियान के दौरान नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया।
मुठभेड़ लगभग आठ घंटे तक रुक-रुक कर चलती रही। इसके बाद तीन महिला और एक पुरुष नक्सली के शव बरामद किए गए। मौके से एक एसएलआर राइफल, दो इंसास राइफल और एक .303 राइफल भी मिली। अधिकारियों के अनुसार अब भी इस क्षेत्र में सर्च अभियान जारी है।
माओवादियों को समाप्त करने की डेड लाइन है मार्च 2027
बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2027 तक पूरे देश से नक्सल को समाप्त कर दिये जाने की घोषणा पहले से ही कर रखी है। केंद्रीय और राज्य सरकार की फोर्स लगातार माओवादियों को पीछे धकेल रही है। इस दौरान काफी उच्च स्तर के माओवादी मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद कहीं-कहीं वारदात को अंजाम देकर माओवादी अपना दहशत कायम करने की अभी भी कोशिश कर रहे हैं।



