नई दिल्ली: राजधानी की जीवनरेखा को पुर्नस्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, जल शक्ति मंत्रालय ने यमुना नदी की साफ सफाई और पुनरुद्धार के उद्देश्य से एक एकीकृत योजना दृष्टिकोण की औपचारिक शुरुआत की। इसके मद्देनजर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (एनआईयूए) और दिल्ली सरकार के सहयोग से बुधवार को भारत मंडपम में दिल्ली के लिए शहरी नदी प्रबंधन योजना (यूआरएमपी) की तैयारी के लिए एक शुरुआती हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला का उद्देश्य यूआरएमपी दृष्टिकोण और दिल्ली के लिए यूआरएमपी विकसित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में विभिन्न हितधारकों के बीच साझा समझ को बढ़ावा देना था। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने यमुना नदी के पुनरुद्धार हेतु एक एकीकृत और सहयोगात्मक दृष्टिकोण की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरी नदी प्रबंधन योजना (यूआरएमपी) को केवल एक दस्तावेज न बनकर, वैज्ञानिक समझ, जोखिम-आधारित मूल्यांकन और सक्रिय हितधारक भागीदारी पर आधारित एक गतिशील योजना और कार्यवाही के रूप में कार्य करना चाहिए। यह ढांचा नदी के समग्र सार को समाहित करने और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए दिल्ली के शहरी नियोजन में नदी-संवेदनशील सोच को शामिल करने के लिए डिजाइन किया गया है।
दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, धर्मेंद्र ने स्पष्ट संदेश दिया यमुना सुधरेगी, दिल्ली सुधरेगी। उन्होंने तत्काल, जमीनी परिणामों का आह्वान किया और यमुना पुनरुद्धार के लिए एक व्यावहारिक और कार्यान्वयन योग्य योजना पर जोर दिया। उन्होंने दिल्ली की जीवन रेखा के रूप में यमुना की भूमिका को रेखांकित किया और हितधारकों से नालों की सफाई और सीवेज बुनियादी ढांचे को उन्नत करने से लेकर यमुना नदी के साथ दिल्ली के संबंधों को फिर से जीवंत करने तक जिम्मेदारी स्वीकार करने का आग्रह किया। उन्होंने दिल्ली के सतत विकास को गति देने और राष्ट्रीय राजधानी के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए यूआरएमपी ढांचे के उपयोग पर जोर दिया।
कार्यक्रम में नीदरलैंड की राजदूत मारिसा जेरार्ड्स, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, (डीजेबी) कौशल राज शर्मा, रेबेका एपवर्थ (विश्व बैंक), लौरा सुस्टरसिक परियोजना निदेशक (जीआईजेड), राजीव रंजन मिश्रा (मुख्य सलाहकार, जल और पर्यावरण, एनआईयूए), संदीप मिश्रा सदस्य सचिव, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, देबोलीना कुमडू, निदेशक (एनआईयूए) और प्रोफेसर सी.आर. बाबू, प्रोफेसर एमेरिटस दिल्ली विश्वविद्यालय शामिल थे।



