नई दिल्ली: ईपीएफओ ने पीएफ निकासी की प्रक्रिया में होने वाली देरी और भ्रम को दूर करने के लिए नियमों को अपडेट किया है। पहले निकासी के 13 अलग-अलग कारण होते थे, जिन्हें अब केवल 3 मुख्य श्रेणियों में मिला दिया गया है: अनिवार्य आवश्यकताएं (Essential Needs), आवास की जरूरतें (Housing Needs), और विशेष परिस्थितियां (Special Circumstances)।
मुख्य बदलाव और निकासी की सीमा
- 100% निकासी कब संभव: सदस्य अपनी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट), 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर, या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के समय पूरा पैसा निकाल सकते हैं। इसके अलावा, स्थायी विकलांगता या विदेश में बसने की स्थिति में भी 100% निकासी की अनुमति है।
- बेरोजगारी के दौरान राहत: यदि किसी सदस्य की नौकरी छूट जाती है, तो वह तुरंत अपने बैलेंस का 75% हिस्सा निकाल सकता है। यदि व्यक्ति 12 महीनों तक बेरोजगार रहता है, तो शेष 25% भी निकाला जा सकता है।
- आंशिक निकासी (पार्शियल विड्रॉल): केवल 12 महीने की सेवा पूरी करने के बाद सदस्य बीमारी, शिक्षा, विवाह या घर के लिए 75% तक पैसा निकाल सकते हैं।
शिक्षा, विवाह और बीमारी के लिए नए नियम
निकासी की संख्या को लेकर अब अधिक लचीलापन दिया गया है:
- शिक्षा: सेवा के दौरान अधिकतम 10 बार पैसा निकाला जा सकता है।
- विवाह: अब 5 बार तक निकासी की अनुमति है (पहले यह सीमा कम थी)।
- चिकित्सा: सदस्य खुद के, जीवनसाथी, बच्चों या माता-पिता के इलाज के लिए एक वित्तीय वर्ष में 3 बार तक पैसा निकाल सकते हैं।
आवास और होम लोन
- घर खरीदने, निर्माण, मरम्मत या होम लोन चुकाने के लिए सदस्य 5 बार तक निकासी कर सकते हैं। यह संपत्ति सदस्य, जीवनसाथी या संयुक्त नाम पर हो सकती है।
न्यूनतम बैलेंस का नियम (मिनिमम बैलेंस)
नए प्रावधान के तहत, सदस्यों को अपने खाते में कम से कम 25% योगदान बनाए रखना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शेष राशि पर वर्तमान 8.25% की वार्षिक दर से ब्याज (Interest) मिलता रहे और भविष्य के लिए बचत भी बनी रहे।



