नई दिल्ली: देशभर के 47 शहरों में रोजगार मेला का आयोजन हुआ। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को बड़ी सौगात देते हुए शनिवार को 51 हजार नियुक्ति पत्र सौंपे हैं। साथ ही उन्होंने युवाओं को राष्ट्र सेवा का मंत्र दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आज का दिन इन युवाओं के लिए भारत सरकार के विभिन्न विभागों में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का दिन है। उन्होंने विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं शुरू करने वाले युवाओं को बधाई दी और इस बात पर जोर दिया कि अलग-अलग भूमिकाओं के बावजूद, उनका साझा लक्ष्य नागरिक प्रथम के सिद्धांत पर आधारित राष्ट्र सेवा है।
प्रधानमंत्री ने भारत की जनसांख्यिकीय और लोकतांत्रिक नींव की बेजोड़ ताकत पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी और सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ भारत में घरेलू और वैश्विक स्तर पर भविष्य को आकार देने की अद्वितीय क्षमता है। यह विशाल युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी पूंजी है और सरकार इस पूंजी को दीर्घकालिक समृद्धि के उत्प्रेरक में बदलने के अपने प्रयासों में दृढ़ है।
पीएम ने कहा, अभी दो दिन पहले ही वह पांच देशों की यात्रा से लौटे हैं। मैंने जिन भी देशों का दौरा किया, उनमें भारत के युवाओं की शक्ति का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। इस यात्रा के दौरान हुए समझौतों से देश-विदेश में भारतीय युवाओं को लाभ होगा। इस यात्रा के दौरान रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और दुर्लभ मृदा खनिजों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए विभिन्न समझौतों से दूरगामी लाभ होंगे। ये पहल न केवल भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगी बल्कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में युवा भारतीयों के लिए सार्थक अवसर भी पैदा करेंगी।
निजी क्षेत्र में रोजगार पर सरकार का ध्यान
भारत सरकार निजी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। हाल ही में, सरकार ने रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना नामक एक नई योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत, सरकार निजी क्षेत्र में अपनी पहली नौकरी पाने वाले युवाओं को 15,000 रुपये प्रदान करेगी। दूसरे शब्दों में, सरकार उनकी पहली नौकरी के पहले वेतन में योगदान देगी। इसके लिए सरकार ने लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस योजना से लगभग 3.5 करोड़ नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय विकास को गति देने, रोजगार सृजन करने और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में भारत की यात्रा को गति देने में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की परिवर्तनकारी शक्ति पर जोर दिया। हाल के वर्षों में मेक इन इंडिया पहल को काफी मजबूती मिली है। केवल पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना के माध्यम से देश भर में 11 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है।
11 साल में इलेक्ट्रानिक विनिर्माण पांच गुना बढ़ा
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण लगभग 11 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें पिछले 11 वर्षों में पांच गुना से भी अधिक की वृद्धि हुई है। पहले देश में मोबाइल फ़ोन बनाने वाली केवल 2 से 4 इकाइयां ही थी। आज भारत में मोबाइल फ़ोन निर्माण से जुड़ी लगभग 300 इकाइयां हैं जो लाखों युवाओं को रोजगार दे रही हैं।
1.25 लाख करोड़ का रक्षा निर्माण उत्पादन
प्रधानमंत्री ने रक्षा निर्माण के क्षेत्र में भारत के वैश्विक अग्रणी के रूप में उभरने का भी उल्लेख किया। भारत का रक्षा निर्माण उत्पादन 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने विश्व के सबसे बड़े रेल इंजन निर्माता के रूप में भारत के उभरने और रेल इंजन, रेल डिब्बों और मेट्रो डिब्बों के निर्यात में देश के मज़बूत प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने केवल पांच वर्षों में 40 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ है, जिससे नए कारखाने लगे, नए रोजग़ार के अवसर उत्पन्न हुए और वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री हुई।
कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में 90 करोड़
प्रधानमंत्री ने भारत की कल्याणकारी पहलों के दूरगामी प्रभावों पर जोर देते हुए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की एक हालिया रिपोर्ट का उल्लेख किया। इसमें बताया गया है कि पिछले एक दशक में 90 करोड़ से अधिक भारतीय नागरिक सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में आए हैं। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं केवल कल्याणकारी लाभों तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि इन्होंने बड़े पैमाने पर विशेषत: ग्रामीण भारत में रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने प्रत्येक नागरिक को ईश्वर मानने के नागरिक देवो भव: के मार्गदर्शक सिद्धांत का आह्वान किया तथा नवनियुक्त सदस्यों को सार्वजनिक सेवा में उज्ज्वल और सार्थक भविष्य के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।



