आदिवासी क्षेत्रो में सरकार के एकलव्य अब नए नए कीर्तिमान रच रहे है। आंकड़ों के हिसाब से वर्ष 2024 -25 में एकलव्य आवासीय स्कूलों (EMRS) के करीब 597 छात्रों ने देश की बड़ी परीक्षाओं जैसे JEE / JEE MAINS / JEE ADVANCE तथा NEET में रिकार्ड सफलता हासिल की। इसे बड़ी उछाल माना जा रहा है क्योंकि इन स्कूलों में 2022-23 में यह अनुपात केवल 2 हुआ करता था।
इस तरह एकलव्य विद्यालय के रूप में लक्ष्य आधारित शिक्षा की यह मुहिम भारत की अति पिछड़ी आदिवासी जनजातियों के जीवन में बदलाव ला रही है। गौरतलब है की बारहवीं क्लास तक शिक्षा प्रदान करने वाले देश के कुल 230 एकलव्य आदर्श विद्यालयों मे 101 विद्यालयों के छात्रों ने उपरोक्त परीक्षाओं में यह सफलता हासिल की है।
क्या है एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय..?
पोषण के साथ-साथ CBSE सिलेबस की फ्री शिक्षा देने के लिए आदिवासी मामलो के मंत्रालय द्वारा ये विद्यालय स्थापित किए गए हैं। गौरतलब है 31 जुलाई 2025 तक देश में कुल 722 एकलव्य विद्यालय स्वीकृत किये गए हैं जिनमे 485 विद्यालय अभी कार्यशील हैं।

क्या हैं IIT-JEE और NEET परीक्षाएं?
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT इंजीनियरिंग और तकनीकी पढ़ाई से जुडी संस्था है। संयुक्त प्रवेश परीक्षा यानी JEE एक राष्ट्रीय स्तर की इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा है जो दो चरणों में पूरी होती है जो JEE MAINS और JEE ADVANCE कहलाती हैं। जबकि JEE MAINS एक जाँच परीक्षा है जिसमे उन उम्मीदवारों का चयन होता है जो JEE ADVANCE की परीक्षा में बैठने लायक होते है। इस परीक्षा में चयनित छात्रों को आईआईटी में एडमिशन मिलता है। समूचे देश में करीब 23 IIT संस्थान हैं।
इसको भी पढ़ें: पानी बचाने वालों को सरकार का सलाम, मिलेंगे जल पुरस्कार
देश में समान शिक्षा के कानून और संवैधानिक प्रावधान
भारतीय संविधान ने देश के हर नागरिक को समान और गुणवत्तापरक शिक्षा का अधिकार देता है। संविधान में अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित की गई है। वहीं अनुच्छेद 15, 46 और 29 के माध्यम से सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा और आरक्षण का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2006 में बने आरक्षण अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को शिक्षा संस्थानों में आरक्षण का अधिकार मिला। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, समग्र शिक्षा अभियान और एकलव्य विद्यालय जैसी योजनाएं इस उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए देश के हर बच्चे को समान अवसर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही हैं।




