नई दिल्ली: हाल ही में प्रकाशित सोनाली मराठे का नया कविता संग्रह ‘खामोशियाँ’ साहित्य जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है. सर्वभाषा प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2024 में जारी यह संग्रह न केवल स्त्री-मन की संवेदनाओं को उजागर करता है, बल्कि खामोशी के भीतर छिपे कोलाहल को भी शब्दों में पिरोता है।
मौन की रचनात्मक शक्ति :
कवि और आलोचक डॉ. संतोष पटेल ने पुस्तक की भूमिका में फ्रांसिस बेकन का संदर्भ देते हुए लिखा है कि मौन वह नींद है जो ज्ञान का पोषण करती है। उनके अनुसार, सोनाली जी की कविताओं में मौन केवल चुप्पी नहीं, बल्कि एक बेहद ‘लाउड’ (मुखर) आवाज है जो पाठक को सचेत करती है। कवयित्री ने अपनी खामोशी को अकेलेपन से निकालकर ‘एकांत’ की ओर मोड़ा है, जहाँ समस्याओं का निदान संभव है।
स्त्री-अस्तित्व और घरेलू जीवन के बिम्ब
संग्रह की कविताएँ एक गृहिणी के जीवन के झंझावातों और उसके दैनिक अनुभवों को सहजता से दर्ज करती हैं:
अस्तित्व की लड़ाई: कवयित्री लिखती हैं कि अंततः ‘स्त्री होने के अलावा’ कुछ भी शेष नहीं बचता, फिर भी वह हर मोड़ पर डटी रहती है।
घरेलू संवाद: घर के काम करने वाली ‘मौसी’ के साथ उनके संवाद और अपनी स्वयं की संकीर्णता पर किया गया कटाक्ष मानवीय संवेदनाओं को गहराई से छूता है।
दैनिक संघर्ष: रोटियाँ बेलना, बर्तन चमकाना और घर का कोना-कोना संवारना केवल काम नहीं, बल्कि स्त्री का अपने आप से संवाद है।
सामाजिक चेतना और प्रकृति प्रेम
यह संग्रह केवल व्यक्तिगत अनुभूतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गहरा सामाजिक सरोकार भी झलकता है:
लॉकडाउन की त्रासदी: संग्रह की एक मार्मिक कविता पिछले लॉकडाउन के दौरान रेल की पटरियों पर हुई कामगारों की मृत्यु पर लिखी गई है, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
प्रकृति से जुड़ाव: कवयित्री स्वयं को नदी और वृक्षों के करीब पाती हैं. वे लिखती हैं, ‘मैं तुम्हें मरने नहीं दूँगी प्रिय पेड़, ताकि कोई प्रेमी तुम्हारी छाँव में प्रेम कर सके’.
समकालीन मुद्दे: वे काल्पनिक गौरव के बजाय राशन, बिजली, शिक्षा और रोज़गार जैसे बुनियादी मुद्दों को कविता का केंद्र बनाती हैं।
भाषा का सौंदर्य
मूलतः मराठी भाषी होने के बावजूद सोनाली मराठे ने अभिव्यक्ति के लिए हिंदी का चयन किया है, ताकि वे बड़े पाठक वर्ग से जुड़ सकें. उनकी भाषा सरल है, लेकिन भावों में अगाध गहराई है. संग्रह में लगभग 90 से अधिक रचनाएँ शामिल हैं, जो खिड़की, दीवार और चाय जैसी साधारण वस्तुओं को भी जीवंत बिम्बों में बदल देती हैं.
पुस्तक विवरण:
खामोशियाँ, काव्य संग्रह
लेखिका: सोनाली मराठी

समीक्षक: संतोष पटेल




