नई दिल्ली: दिल्ली भाजपा ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक आस्था के मामलों पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी वयस्क व्यक्ति के जीवन जीने के तरीके में हस्तक्षेप करना किसी भी सामाजिक संगठन के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर व्यक्तिगत अधिकारों और कानून व्यवस्था के बीच की सीमा रेखा को रेखांकित किया।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान, धर्मांतरण का विरोध
प्रवीण शंकर कपूर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रत्येक वयस्क पुरुष और महिला को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा, “भाजपा प्रत्येक व्यक्ति की अपनी मर्जी से जीवन जीने की स्वतंत्रता का पूर्ण सम्मान करती है। हालांकि, पार्टी का स्टैंड बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि कहीं भी जबरन धार्मिक धर्मांतरण जैसा मामला आता है, तो हम उसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।”
पुलिस की भूमिका पर दिया जोर
भाजपा प्रवक्ता ने सामाजिक संगठनों को ऐसे संवेदनशील और व्यक्तिगत मामलों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी। बयान की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- हस्तक्षेप की मनाही: किसी भी संगठन को किसी व्यक्ति की जीवन-शैली या धार्मिक आस्था जैसे निजी विषयों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
- दिल्ली पुलिस पर भरोसा: भाजपा का मानना है कि ऐसे मामलों को पूरी तरह दिल्ली पुलिस पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
- सक्षम जांच प्रणाली: श्री कपूर ने कहा कि दिल्ली पुलिस के पास उच्च प्रशिक्षित एवं सक्षम जांच अधिकारियों की एक अनुभवी टीम उपलब्ध है, जो किसी भी कानूनी विवाद या शिकायत की जांच करने में पूरी तरह समर्थ है।
सामाजिक सौहार्द का संदेश
भाजपा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अक्सर व्यक्तिगत संबंधों और धार्मिक मामलों में विभिन्न समूहों के हस्तक्षेप की खबरें चर्चा में रहती हैं। पार्टी ने इस बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि कानून को अपने हाथ में लेने या व्यक्तिगत जीवन में नैतिकता के नाम पर दखल देने की किसी को अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने दोहराया कि भाजपा का दृढ़ विश्वास है कि सामाजिक विषयों को पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए।



