Climate Crisis: अंटार्कटिक के हर्ड द्वीप पर ग्लेशियरों का 25% हिस्सा पिघला

एक शोध से पता चला है कि हर्ड द्वीप के 25% ग्लेशियर कुछ दशकों में पिघल गए हैं। इससे द्वीप की अनूठी जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा खड़ा हो गया है।

Share This Article:

नई दिल्ली: अंटार्कटिका के हर्ड द्वीप, जो दुनिया के सबसे प्राचीन और अनछुए पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है, जलवायु परिवर्तन (Climate Crisis) की चपेट में आ चुका है। एक अध्ययन से पता चला है कि इस द्वीप के लगभग 25% ग्लेशियर पिछले कुछ दशकों में पिघल चुके हैं। इसने वैज्ञानिकों को तत्काल जलवायु कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है। वह इसलिए कि नुकसान द्वीप की अनूठी जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। हर्ड द्वीप, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, अंटार्कटिका से करीब 1,700 किलोमीटर उत्तर में दक्षिणी महासागर में स्थित है।

70 सालों में 60 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा बर्फ गायब

मोनाश विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए शोध के अनुसार, 1947 से 2025 तक हर्ड द्वीप के ग्लेशियरों का लगभग 60 वर्ग किलोमीटर हिस्सा, यानी कुल बर्फ का 25% हिस्सा, पिघल चुका है। यह क्षेत्र पृथ्वी की सबसे दुर्गम जगहों में से एक है, फिर भी यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से नहीं बच सका। शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन ने इस संकट को जन्म दिया है। हर्ड द्वीप का स्थान इसे वैश्विक जलवायु प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है, जो ग्रह के स्वास्थ्य को दर्शाता है। इस द्वीप पर हो रहे बदलाव जलवायु परिवर्तन के वैश्विक प्रभावों की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।

पुराने नक्शों और उपग्रह चित्रों से खुलासा

हर्ड द्वीप की दुर्गमता के कारण वहां प्रत्यक्ष अध्ययन करना चुनौतीपूर्ण है। शोधकर्ताओं ने 1947 के स्थलाकृतिक मानचित्रों और आधुनिक उपग्रह चित्रों का उपयोग करके ग्लेशियरों के नुकसान का आकलन किया। अध्ययन में 30 ग्लेशियरों की पहचान की गई, जिनके 1947, 1988 और 2024 में रिकॉर्ड किए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इन ग्लेशियरों की ढलान, ऊंचाई, और सतही विशेषताओं का दस्तावेजीकरण किया गया, जिससे बर्फ के द्रव्यमान, आयतन, और गति के साथ-साथ ज्वालामुखी मलबे के प्रभाव का अनुमान लगाया जा सका। शोधकर्ता इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलियाई अंटार्कटिक कार्यक्रम के तहत हर्ड द्वीप की यात्रा की योजना बना रहे हैं, ताकि ग्लेशियरों के पिघलने से जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों का और गहराई से अध्ययन किया जा सके।

कंप्यूटर मॉडल से भविष्य का अनुमान

द क्रायोस्फीयर पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि वैज्ञानिक कंप्यूटर मॉडल का उपयोग करके यह अनुमान लगा रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के विभिन्न परिदृश्यों में हर्ड द्वीप के ग्लेशियर कैसे प्रतिक्रिया देंगे। शोधकर्ताओं ने दो संभावित भविष्यों की पड़ताल की: एक, जहां ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, और दूसरा, जहां उत्सर्जन बिना किसी रोक-टोक के बढ़ता रहेगा। यह अध्ययन दर्शाता है कि ग्लेशियरों का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से कम किया जाता है।

हर्ड द्वीप: बर्फ, ज्वालामुखी और जैव विविधता का अनूठा संगम

हर्ड द्वीप का 60% से अधिक हिस्सा बर्फ से ढका है, और इसमें बिग बेन नामक एक सक्रिय ज्वालामुखी भी मौजूद है, जिसकी ऊंचाई हाल के अध्ययनों के अनुसार 2,800 मीटर से अधिक हो सकती है। यह द्वीप अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, लेकिन ग्लेशियरों के पिघलने से पर्वतीय प्रजातियों और पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह द्वीप अपनी अनूठी जैव विविधता खो सकता है। दूसरी ओर, समय रहते कार्रवाई से इस प्राकृतिक धरोहर को बचाया जा सकता है।हाल ही में हर्ड द्वीप तब चर्चा में आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस द्वीप और पास के मैकडोनाल्ड द्वीप पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जबकि इन क्षेत्रों में 2016 के बाद से कोई व्यापारिक गतिविधि या मानवीय आवाजाही दर्ज नहीं की गई है।

इसको भी पढ़ें: Climate Change: समुद्री हीटवेव से विस्थापित हो रहे समुद्री जीव

जलवायु कार्रवाई की तत्काल जरूरत

यह शोध जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है। हर्ड द्वीप जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में हो रहे बदलाव न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और वैश्विक सहयोग से ही इस तरह के प्राचीन क्षेत्रों को बचाया जा सकता है, जो ग्रह के पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

NewG Network

contact@newgindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.