सरकारी संचार पर मंथन: विज्ञान को सरल बनाने का आह्वान

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकारी संचार को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। विज्ञान संचार में कहानी कहने की शैली अपनाने और मंत्रालयों के बीच संदेशों का समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश। नई मीडिया और माईगव प्लेटफॉर्म के माध्यम से जन भागीदारी बढ़ाने की योजना। विभागों को कम से कम दो सफलता की कहानियां सार्वजनिक करने को कहा गया। 

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नई दिल्ली: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक नवंबर को प्रभावी सरकारी संचार पर एक मंथन सत्र की अध्यक्षता की। इस सत्र में उनके अधीनस्थ मंत्रालयों और विभागों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य जन संचार रणनीतियों को मजबूत करना और सरकारी संदेशों को अधिक संबंधित, पारदर्शी और प्रभावशाली बनाना था।

विज्ञान संचार में कहानी की शक्ति

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान संचार को सरल बनाने के लिए कहानी कहने (स्टोरीटेलिंग) की शैली अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जटिल वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी सरल और संबंधित कथाओं के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जा सकता है। मंत्री ने सभी वैज्ञानिक संस्थानों और प्रयोगशालाओं को निर्देश दिया कि वे कम से कम दो ऐसी सफलता की कहानियां चिह्नित करें, जिन्हें प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सके। ये कहानियां दिखाएंगी कि उनका कार्य समाज को सीधे कैसे लाभ पहुंचाता है।

पूरे सरकार का दृष्टिकोण अपनाएं

मंत्री ने संचार में निरंतरता के लिए पूरे सरकार का दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach) अपनाने का आह्वान किया। इससे विभिन्न मंत्रालयों के संदेश एक-दूसरे के पूरक बनेंगे और सरकार के व्यापक लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रभावी संचार केवल सूचना प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास निर्माण, जागरूकता पैदा करने और नागरिक भागीदारी को प्रेरित करने का माध्यम है। डॉ. सिंह ने कई अवसरों पर प्रामाणिक, समावेशी और जनजीवन से जुड़े संचार की आवश्यकता पर जोर दिया है।

नई मीडिया और माईगव की भूमिका

सत्र में नई मीडिया विंग के निदेशक बी. नारायणन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डिजिटल माध्यम गति के साथ-साथ समावेशिता भी प्रदान करता है, जिससे संदेश भौगोलिक और जनसांख्यिक सीमाओं को पार कर पहुंचते हैं। शॉर्ट-फॉर्म वीडियो, इंटरएक्टिव ग्राफिक्स और बहुभाषी सामग्री के उदाहरण देते हुए उन्होंने विभागों से रीयल-टाइम जुड़ाव के लिए नई मीडिया का रणनीतिक उपयोग करने का आग्रह किया।

माईगव के सीईओ नंद कुमारुम ने प्लेटफॉर्म को सरकार और नागरिकों के बीच दोतरफा संचार का माध्यम बताया। माईगव ने विचारों, फीडबैक और रचनात्मक इनपुट जुटाने में सफलता हासिल की है, जिससे भागीदारीपूर्ण शासन मजबूत हुआ है। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय स्तर की पहलों के माध्यम से समावेशिता बढ़ाने की योजनाएं साझा कीं।

संचार पारिस्थितिकी में विशेषज्ञों के विचार

प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल धीरेंद्र ओझा ने तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में स्पष्ट, विश्वसनीय और समयबद्ध संचार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी संचार अब प्रेस विज्ञाप्तियों और आधिकारिक बयानों से आगे बढ़कर सक्रिय जुड़ाव, पारदर्शिता और संदेशों में निरंतरता पर केंद्रित होना चाहिए। गलत सूचना के युग में विश्वसनीयता ही आधारभूत तत्व है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव सेंथिल राजन ने पूरे समाज का दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि प्रभावी जन संदेश के लिए सरकार के साथ-साथ सिविल सोसाइटी, अकादमिया और निजी क्षेत्र के साथ समन्वय आवश्यक है। सामुदायिक संगठनों और प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ साझेदारी राष्ट्रीय पहलों की समझ और भागीदारी बढ़ा सकती है।

विभागीय योगदान और स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की सचिव रचना शाह ने स्वागत संबोधन दिया। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) के सचिव वी. श्रीनिवास ने अपने विभाग द्वारा अपनाई गई सफल संचार प्रथाओं और प्रमुख अभियानों एवं सुधारों पर प्रकाश डाला।

निष्कर्ष: संचार को शासन का अभिन्न अंग बनाएं

यह मंथन सत्र विभागों के बीच जन संचार को मजबूत बनाने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कहानी कहने, सहयोग और डिजिटल जुड़ाव पर फोकस कर मंत्रालय नीति और जनता के बीच की खाई को पाटने का लक्ष्य रखते हैं। इससे न केवल विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रशासनिक सुधारों की पहुंच बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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