पटना: बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के उद्देश्य से, बिहार संग्रहालय अपनी 10वीं वर्षगांठ पर एक ऐतिहासिक आयोजन की मेजबानी कर रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 7 अगस्त को ‘Bihar Museum Biennale 2025’ का उद्घाटन करेंगे, जो अगले छह महीनों तक चलेगा। यह आयोजन कला, संस्कृति और इतिहास के प्रेमियों के लिए एक विशिष्ट मंच प्रदान करेगा। बिनाले में दुनिया भर के विद्वान और कलाकार शामिल होंगे, जिससे बिहार को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी और यह दुनिया के आकर्षण का केंद्र बनेगा।
‘ग्लोबल साउथ: साझी विरासत’ थीम पर आधारित
बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह के अनुसार, इस साल बिनाले का मुख्य विषय ‘ग्लोबल साउथ : साझी विरासत’ है। इसमें उन देशों को एक साथ लाने पर जोर दिया गया है जो कभी उपनिवेशवाद का शिकार रहे और अब अपनी सांस्कृतिक पहचान और कलात्मक दृष्टिकोण को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। इस आयोजन में भारत सहित 10 देशों के संग्रहालय और विद्वान हिस्सा ले रहे हैं।
भागीदार देश और संस्थान
अंतरराष्ट्रीय देशों में इंडोनेशिया, श्रीलंका, कज़ाखिस्तान, इथियोपिया, मैक्सिको, अर्जेंटीना, इक्वाडोर, पेरू और वेनेजुएला शामिल हैं जबकि भारतीय संस्थानों में नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, मेहरानगढ़ म्यूजियम और आईसीएआर शामिल हैं।
क्या खास होगा बिनाले में
यह बिनाले सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पर्व है जो विचारों के आदान-प्रदान, सांस्कृतिक संवाद और आपसी सहयोग को बढ़ावा देगा।
प्रदर्शनी
भागीदार देशों की कलात्मक और ऐतिहासिक प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। दुनिया के 69 अनूठे मुखौटे प्रदर्शित किए जाएंगे जो मानवता की साझा कला को दर्शाते हैं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इंडोनेशियाई और थाई मंडलियों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी।
सेमिनार और संवाद
इन देशों के विद्वान सेमिनार में हिस्सा लेंगे और सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा करेंगे। बिनाले के कुछ प्रमुख आकर्षणों में ‘दिव्य मुखौटे’ और ‘अनुष्ठानिक वस्तुएं’, ‘विश्व रूप राम’, ‘मेक्सिको की पौराणिक परंपरा’ और अतीत का वैभव: पटना कलम’ शामिल हैं।
‘जीवन वृक्ष’ से प्रेरित है लोगो
बिहार म्यूजियम बिनाले 2025 का लोगो ‘जीवन वृक्ष’ (Tree of Life) की अवधारणा पर आधारित है। अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि यह लोगो एशिया के पीपल, अफ्रीका के बाओबाब और लैटिन अमेरिका की ओटोमी कला को जोड़ता है। यह साझा विरासत, संरक्षण और पुनर्निर्माण के सार्वभौमिक विचार को दर्शाता है।
बिनाले का इतिहास और उद्देश्य
‘बिनाले’ इतालवी शब्द है जिसका अर्थ ‘द्विवार्षिक’ होता है। बिहार म्यूजियम बिनाले की शुरुआत 2021 में हुई थी, जिसका पहला संस्करण कोरोना महामारी के कारण वर्चुअल मोड में आयोजित हुआ। 2023 में इसका दूसरा संस्करण हुआ, जिसमें ब्राजील, फ्रांस और नेपाल जैसे देशों ने भाग लिया था। महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि इस बिनाले का उद्देश्य संग्रहालयों को सिर्फ इमारतों तक सीमित न रखकर उन्हें जीवंत सांस्कृतिक केंद्रों में बदलना है, जहां कलाकार, विद्वान और आम जनता एक-दूसरे से संवाद कर सकें। बिना किसी दुविधा के, यह आयोजन बिहार की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा।



