पटना: बिहार समेत पूरे देश के उन उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर है जो सीबीएसई स्कूलों और केंद्रीय संस्थानों में 9वीं से 12वीं कक्षा में शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं। अब तक केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए अनिवार्य रही केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) का दायरा बढ़ने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत, अब इन कक्षाओं के लिए भी CTET पास करना अनिवार्य होगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन तैयार कर रहा है, जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके। यह कदम शिक्षण के पेशे में मानकों को ऊंचा उठाने और छात्रों को अधिक योग्य शिक्षकों से शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक अहम पहल है।
अब तक दो स्तरों पर होती थी CTET परीक्षा
अभी तक CTET की परीक्षा दो स्तरों पर ली जाती है।
पेपर 1: कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों के लिए
पेपर 2: कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षकों के लिए
लेकिन अब NCTE की गाइडलाइन जारी होने के बाद, कक्षा 9 से 12 के लिए भी यह परीक्षा आयोजित होगी। संभव है कि इस साल के अंत या अगले साल से यह नियम लागू हो जाए।
CTET 2025 में देरी का कारण और नए बदलाव
सीबीएसई से मिली जानकारी के अनुसार, बोर्ड की कुछ आंतरिक परीक्षाओं के कारण CTET 2025 की परीक्षा में देरी हुई है। हालांकि, परीक्षा के शेड्यूल पर काम चल रहा है। यदि NCTE की नई गाइडलाइन जल्द मिलती है, तो इस साल भी चार स्तरों पर परीक्षा आयोजित हो सकती है।
वर्तमान योग्यता
अभी 9वीं से 12वीं में शिक्षक बनने के लिए बीएड और स्नातकोत्तर (Post-Graduation) की डिग्री जरूरी होती है। हालांकि, कुछ स्कूलों में 6-8वीं कक्षा का CTET पास होना भी एक अतिरिक्त योग्यता मानी जाती है।
बाल वाटिका के लिए भी होगी परीक्षा
CTET के निदेशक (CBSE) जेके यादव के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशानिर्देशों के अनुसार, CTET अब चार स्तरों पर लिया जाएगा। इसमें बाल वाटिका के शिक्षकों के लिए भी एक परीक्षा शामिल होगी। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। NCTE इस संबंध में नीति तैयार कर रहा है और दिशानिर्देश मिलने के बाद सीबीएसई चार स्तरों पर परीक्षा आयोजित करेगा। यह बदलाव संभवतः अगले साल से लागू होगा।
CTET क्या है
CTET यानी केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा, एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है जिसे CBSE द्वारा आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई व्यक्ति शिक्षक बनने के योग्य है या नहीं। जो उम्मीदवार डीएलएड (D.El.Ed) या बीएड जैसे शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स कर चुके हैं, वे इस परीक्षा में भाग ले सकते हैं। CTET पास करने वाले अभ्यर्थी केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और कई निजी स्कूलों में शिक्षक पद के लिए योग्य माने जाते हैं।



