नई दिल्ली: हाल ही में केंद्र सरकार ने 25 ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया है, जिन पर अश्लील और अनुचित सामग्री प्रसारित करने का आरोप है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बच्चों और किशोरों को अनैतिक डिजिटल सामग्री से बचाना और ऑनलाइन कंटेंट को कानूनी व नैतिक दायरे में लाना है।
सरकार ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) को निर्देश दिए हैं कि इन प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइट्स को जनता के लिए ब्लॉक कर दिया जाए। यह पहली बार नहीं है जब ऐसी कार्रवाई हुई है; पिछले साल भी 18 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इसी तरह का प्रतिबंध लगाया गया था। इन प्लेटफॉर्म्स ने सोशल मीडिया के जरिए छोटे वीडियो, ट्रेलर और लिंक साझा कर लाखों उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बनाई थी, जिनमें से कई के गूगल प्ले स्टोर पर 50 लाख से अधिक डाउनलोड थे।
बैन के बाद कितने समय में बंद होते हैं प्लेटफार्म?
किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म या वेबसाइट पर बैन लगने के बाद उसे पूरी तरह बंद होने में समय लग सकता है। यह अवधि कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि उल्लंघन की गंभीरता, वेबसाइट का प्रकार और उसका तकनीकी ढांचा। अगर मामला गंभीर है, जैसे कि राष्ट्रीय सुरक्षा या गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़ा, तो संबंधित वेबसाइट को कुछ घंटों में ब्लॉक किया जा सकता है।
सामान्य उल्लंघनों, जैसे अनुचित कंटेंट, के लिए प्रक्रिया में कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों तक का समय लग सकता है। आईएसपी को निर्देश मिलने के बाद वे डोमेन नेम सिस्टम (डीएनएस) ब्लॉकिंग या आईपी ब्लॉकिंग जैसे तकनीकी उपाय अपनाते हैं। कुछ मामलों में, अगर वेबसाइट संचालक नियमों का पालन करने के लिए बदलाव करते हैं, तो समीक्षा के बाद बैन हटाया भी जा सकता है।
क्या होता है ‘शट डाउन’ बटन?
वेबसाइट या ओटीटी प्लेटफॉर्म को बंद करने के लिए कोई एक ‘शट डाउन’ बटन नहीं होता। यह एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें सरकारी आदेश, आईएसपी की कार्रवाई और तकनीकी ब्लॉकिंग शामिल होती है। कुछ मामलों में सर्वर होस्टिंग कंपनियां भी सेवाएं बंद कर सकती हैं। अगर वेबसाइट विदेशी सर्वर पर होस्ट की गई है, तो कार्रवाई में अधिक समय लग सकता है।



