नई दिल्ली: आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक वरिष्ठ कमांडर ने पाकिस्तान की सैन्य लीडरशिप और आतंकी संगठनों के बीच गहरे गठजोड़ को लेकर बड़ा खुलासा किया है।
कमांडर इलियास कश्मीरी ने दावा किया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जवाब में पाकिस्तानी कार्रवाई को ‘गजवा-ए-हिंद’ (कट्टरपंथी विचारधारा के तहत भारत के खिलाफ युद्ध) का नाम दिया था।
रावलकोट में आतंकियों को दी गई ‘दीक्षा’
यह खुलासा 5 फरवरी को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुआ। नए भर्ती हुए आतंकियों को संबोधित करते हुए कश्मीरी ने बताया कि जब भारत के साथ सीमा पर तनाव चरम पर था, तब सैन्य नेतृत्व ने इसे केवल सीमा विवाद नहीं, बल्कि एक ‘धार्मिक युद्ध’ के रूप में पेश किया था।
इलियास कश्मीरी ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में कहा, “जब लड़ाई शुरू हुई, टैंक और लड़ाकू विमान आमने-सामने थे, तब कमांडर (आसिम मुनीर) ने घोषणा की कि यह ‘गजवत-उल-हिंद’ और ‘बुनयान अल-मरसूस’ है।”
क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’? बता दें कि मई 2025 में भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे) के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK के भीतर घुसकर आतंकी ट्रेनिंग कैंपों, लॉन्च पैड्स और कमांड सेंटरों को सटीक निशाना बनाया था। भारत ने इसे आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने वाली एक ‘सटीक और आनुपातिक’ कार्रवाई बताया था।
सेना और आतंकियों का पुराना मेल
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जैश कमांडर का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान की सरकारी संस्थाएं और सेना अभी भी कट्टरपंथी विमर्श का सहारा ले रही हैं। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह कहता रहा है कि पाकिस्तान की धरती पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को न केवल सुरक्षित पनाहगाह मिल रही है, बल्कि उन्हें वैचारिक समर्थन भी दिया जा रहा है।
जैश कमांडर ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि उनकी पहचान ‘जिहाद’ है और वे कश्मीर को ‘आजाद’ कराने के लिए पाकिस्तान सरकार के समर्थन के बिना भी अपना एजेंडा जारी रखेंगे।



