नई दिल्ली: विश्व मुक्केबाजी कप (Boxing World Cup) में मंगलवार का दिन भारत के नाम रहा, जब 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी (Arundhati Choudhary) ने रिंग में दमदार वापसी के साथ तीन बार की जर्मन चैंपियन लियोनी मूलर (Leonie Mueller) को पराजित कर सबको हैरान कर दिया। अरुंधति की इस जीत ने न सिर्फ टूर्नामेंट में बड़ा उलटफेर किया, बल्कि भारतीय दल के मनोबल को भी नई दिशा दी। लगभग डेढ़ साल बाद रिंग में लौटीं इस युवा भारतीय मुक्केबाज (India Boxing Team) ने पहले ही राउंड से मुकाबले की कमान अपने हाथ में ले ली।
पहले राउंड से ही बढ़त, फिर दो बार नॉकडाउन
मैच के शुरुआती दो राउंड में अरुंधति ने अपना आक्रामक पक्ष दिखाया और लगातार सटीक पंच लगाकर मूलर पर दबाव बनाया। दूसरे राउंड में उन्होंने जर्मन खिलाड़ी को पहली बार गिराया और इसके बाद तीसरे राउंड में दोबारा नॉकडाउन कर मैच को निर्णायक मोड़ दे दिया। रेफरी को मुकाबला रोकना पड़ा और आरएससी जीत दर्ज कर अरुंधति ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में विजयी वापसी की।
जीत के बाद उन्होंने कहा कि पेरिस ओलंपिक क्वालिफायर में हार और कलाई की सर्जरी के बाद रिंग में वापसी आसान नहीं थी। शुरुआत में घबराहट जरूर रही, लेकिन उन्होंने खुद को संभालकर वह प्रदर्शन किया जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है। “यह वही पल था जिसका मैं महीनों से इंतजार कर रही थी,” उन्होंने कहा।
अन्य भारतीय मुक्केबाजों का भी शानदार प्रदर्शन
अरुंधति की जीत के अलावा भारत के कई अन्य खिलाड़ियों ने भी अपने-अपने वर्ग में फाइनल में प्रवेश किया। मीनाक्षी (48 किग्रा) ने कोरिया की बक चो-रोंग के खिलाफ 5-0 की एकतरफा जीत दर्ज की। उनकी तेज मूवमेंट और सॉलिड डिफेंस ने पूरे मुकाबले में कोरियाई खिलाड़ी को कोई मौका नहीं दिया। अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने भी ऑस्ट्रेलिया के मार्लन सेवेहोन को 5-0 से हराकर फाइनल का टिकट पक्का किया। तेजी और लगातार आक्रामकता उनकी जीत की बड़ी वजह रही। नूपुर (80+ किग्रा) ने यूक्रेन की मारिया लोवचिंस्का के खिलाफ शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी और बेहतरीन संयम दिखाते हुए जीत हासिल की।
प्रवीन हुड्डा ने किया दिन का सबसे बड़ा उलटफेर
दिन का सबसे बड़ा रोमांचक मुकाबला 60 किलोग्राम वर्ग में देखने को मिला, जहां प्रवीन हुड्डा (Praveen Hooda) ने पोलैंड की राईगेल्स्का एनेटा को 3-2 से मात देते हुए चौंका दिया। एनेटा इससे पहले विश्व कप की रजत पदक विजेता रह चुकी हैं, लेकिन प्रवीन ने निर्णायक पलों में बेहतरीन रिंग क्राफ्ट और रणनीति से जीत अपने नाम की। आखिरी राउंड में उनका काउंटर-अटैक प्रभावी रहा, जिसने निर्णायकों को प्रभावित किया।
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भारत के लिए सुनहरा मौका
टूर्नामेंट में कई भारतीय खिलाड़ियों के फाइनल तक पहुँचने से पदकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। खासकर अरुंधति और प्रवीन ने जिस अंदाज में अपने मुकाबले जीते हैं, उसने भारत के अभियान को मजबूती दी है। यदि फाइनल राउंड में भी यही प्रदर्शन जारी रहता है, तो भारत इस बार विश्व मुक्केबाजी कप में रिकॉर्ड सफलता दर्ज कर सकता है।



