नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी को राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के समीप दफनाया गया। इससे पहले दोपहर 2:30 बजे ढाका स्थित बांग्लादेश संसद भवन के साउथ प्लाजा में उनके जनाजे की नमाज अदा की गई। जनाजे में अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस भी शामिल हुए।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे समर्थक
जनाजे के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। इसी बीच, इंकलाब मंच के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने समर्थकों से जनाजे के बाद प्रदर्शन के लिए शाहबाग पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वे केवल शोक मनाने नहीं, बल्कि उस्मान हादी के लिए न्याय की मांग को लेकर एकत्र हुए हैं।
सरकार को अल्टीमेटम
अब्दुल्ला अल जाबेर ने आरोप लगाया कि घटना को एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अगले 24 घंटों के भीतर यह स्पष्ट किया जाए कि अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है।
हादी को कोई मिटा नहीं सकता
उधर, संसद परिसर में नमाज के बाद अंतरिम नेता मोहम्मद युनूस ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज यहां लाखों लोग जमा हुए हैं। सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है। लोग उस्मान हादी के बारे में जानना चाहते हैं। हादी, हम आपको विदा करने नहीं आए हैं। आप हमारे दिलों में बसे हैं और जब तक बांग्लादेश का अस्तित्व रहेगा, आप हर बांग्लादेशी के दिल में जीवित रहेंगे। इसे कोई मिटा नहीं सकता।
अलर्ट पर भारतीय सेना
हादी की मौत के विरोध में इंकलाब मंच और जमात से जुड़े कट्टरपंथी संगठनों ने शुक्रवार को बेनापोल से भारत-बांग्लादेश सीमा तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश को सौंपा जाए। चटगांव में कुछ कट्टरपंथी समूहों ने चंद्रनाथ मंदिर के बाहर धार्मिक नारेबाजी की, जिससे इलाके में तनाव फैल गया। इधर, बांग्लादेश में बदलते हालात के मद्देनज़र भारत ने भी अपनी सुरक्षा तैयारियां बढ़ा दी हैं। भारतीय सेना हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है। भारतीय सेना के ईस्टर्न कमांड प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आर.सी. तिवारी ने गुरुवार शाम भारत-बांग्लादेश सीमा का दौरा किया और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की।



