नई दिल्ली: मौसम का मिजाज कैसा रहेगा, अब इसका जवाब एआई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की संस्थाएं एआई-आधारित उपकरणों से मौसम और जलवायु पूर्वानुमान लगा रही हैं। इनमें चक्रवात की तीव्रता का अनुमान लगाने के लिए ड्वोरक तकनीक (एआईडीटी), एआई/एमएल आधारित मॉडल, मौसम पूर्वानुमान के लिए हाइब्रिड (एआई+डायनामिकल) मॉडल तैयार किए गए हैं। मौसमजीपीटी (मौसम जनरेटिव प्री-ट्रेन्ड ट्रांसफॉर्मर) का भी विकास किया जा रहा है, जो एक एआई-आधारित चैटबॉट है जिसे किसानों और हितधारकों के लिए जलवायु सेवा सलाहकार के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।
बिजली-तूफान और बारिश में एआई
मौसम के पूर्वानुमान लगाने के संबंध में एआई और एमएल पर शोध भी किए जा रहा है। अब तक कई शोध कार्य किए जा चुके हैं। इनमें लघु-अवधि वैश्विक पूर्वानुमान, वर्षा संबंधी आंकड़ों का डाउनस्केलिंग, आग के स्थान का पूर्वानुमान, कोहरे का पूर्वानुमान, बिजली/तूफान का पूर्वानुमान, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में बेहतर वैश्विक वर्षा के लिए गहन शिक्षण जैसे शोध कार्य शामिल हैं।
गांवों में मिल रही जानकारी
पिछले साल आईएमडी ने पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) के सहयोग से कई मौसम पूर्वानुमान मॉडल के आधार पर अत्याधुनिक मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल पूर्वानुमान का उपयोग करके ग्राम पंचायत स्तरीय मौसम पूर्वानुमान (जीपीएलडब्ल्यूएफ) शुरू किया था। ये पूर्वानुमान ई-ग्राम स्वराज, मेरी पंचायत ऐप, एमओपीआर के ई-मंचित्रा और आईएमडी के मौसम ग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।
इसका मुख्य लक्ष्य और उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान पहुंचाना। यह प्लेटफॉर्म देश भर में पंचायत स्तर पर किसी भी समय और कहीं भी मौसम पूर्वानुमान की जानकारी उपलब्ध कराता है।
‘मेघदूत’ और ‘मौसम’ पहुंचाते हैं खबर
किसान ‘मेघदूत’, ‘मौसम’ जैसे मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप, फेसबुक के माध्यम से विशेष एरिया का पूर्वानुमान और सलाह किसानों तक पहुं रही हैं। आईएमडी ने अपनी सेवाओं को 18 राज्य सरकारों के आईटी प्लेटफार्मों के साथ एकीकृत किया है। इससे लोगों को क्षेत्री भाषा में भी जानकारी मिल रही है।
जलवायु परिवर्तन पर दो राष्ट्रीय मिशन
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) जलवायु परिवर्तन पर दो राष्ट्रीय मिशनों को अपने आंतरिक बजट आवंटन से लागू कर रहा है। ये हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमएसएचई) और जलवायु परिवर्तन के लिए रणनीतिक ज्ञान पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएसकेसीसी) हैं। एनएमएसएचई के तहत कुल ₹111.63 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। हिमालयी इकोसिस्टम के पर्यावरणीय महत्व को देखते हुए विभाग ने ‘राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति (एनईसी)’ का गठन किया है। इसमें शिक्षाविदों और अनुसंधान संगठनों के प्रतिष्ठित जलवायु वैज्ञानिक और संबंधित मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल हैं। एनईसी एनएमएसएचई के तहत अनुसंधान कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा और मूल्यांकन के लिए नियमित अंतराल पर बैठकें करती है।



