नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम आज एक अनूठी ऊर्जा और करुणा का गवाह बना। अवसर था 19वीं ‘कैंसपोर्ट वॉक फॉर लाइफ’ वॉकथॉन का। कैंसर पीड़ितों और उनके परिवारों को यह संदेश देने के लिए कि ‘वे अकेले नहीं हैं’, समाज के हर वर्ग के हजारों लोग एक साथ सड़कों पर उतरे। इस वॉकथॉन का उद्देश्य कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना और पीड़ितों के लिए उपशामक देखभाल हेतु संसाधन जुटाना था।

अभियान के मुख्य बिंदु
- साझा संकल्प: डॉक्टर, छात्र, कॉर्पोरेट दिग्गज और आम नागरिक—हजारों कदम, एक मकसद।
- विरासत: संस्थापिका हरमाला गुप्ता के नेतृत्व में 2008 से निरंतर जारी है यह वॉकथॉन।
- उपलब्धि: कैंसपोर्ट पिछले 29 वर्षों में 6 लाख से अधिक कैंसर रोगियों को सहायता प्रदान कर चुकी है।
- वैश्विक पहचान: WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) द्वारा म्मानित संस्था, जो घर-घर जाकर मुफ्त देखभाल प्रदान करती है।
- लक्ष्य: कैंसर से जुड़ी सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ना और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता सुधारना।

उम्मीद का एक कारवां
नेहरू स्टेडियम का माहौल आज किणों में हैं या असहनीय दर्द से जूझ रहे हैं। उन्हें न केवल चिकित्सा सहायता, बल्कि भावनात्मक संबल भी दिया जाता है। 29 वर्षों की इस यात्रा में 6 लाख से अधिक परिवारों का सहारा बनकर कैंसपोर्ट ने यह साबित किया है कि कैंसर जीवन का अंत नहीं है।
युवाओं और कॉरपोरेट्स की भागीदारी इस साल की वॉकथॉन में युवाओं की रिकॉर्ड भागीदारी देखी गई। कई स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों ने बैनर और नारों के जरिए कैंसर की समय पर जांच (Early Detection) के महत्व को रेखांकित किया। वहीं, कॉरपोरेट जगत ने भी इस नेक कार्य के लिए अपना समर्थन दिया। हरमाला गुप्ता ने प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “हर कदम जीवन की पुष्टि है और जब तक समाज साथ खड़ा है, कैंसर से कोई नहीं हारेगा।”



