नई दिल्ली: नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 21-22 नवंबर 2025 को एशियाई और प्रशांत आपदा सूचना प्रबंधन केंद्र (APDIM) की गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक हुई। इसका विषय “समावेशी आपदा जोखिम डेटा गवर्नेंस” था। केंद्रीय गृह एवं आपदा प्रबंधन राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इसमें हिस्सा लिया। उनके साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य राजेंद्र सिंह और सचिव मनीष भारद्वाज भी थे।
भारत करेगा क्षमता निर्माण की अगुआईः नित्यानंद राय
उद्घाटन भाषण में नित्यानंद राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय आपदा सहनशीलता को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत APDIM की अध्यक्षता कर रहा है और जोखिम मूल्यांकन, भू-स्थानिक तकनीक, प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान, अर्ली वार्निंग सिस्टम और जलवायु-सहिष्णु बुनियादी ढांचे की योजना में व्यापक क्षमता निर्माण का एजेंडा आगे बढ़ाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आपदा और जलवायु जोखिम को कम करने के लिए भारत APDIM और सभी क्षेत्रीय साझेदारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा।
मोदी जी के 10-सूत्री एजेंडे पर चल रहा सहयोग
राज्य मंत्री ने बताया कि UN ESCAP, APDIM और अन्य बहुपक्षीय मंचों के साथ भारत का सहयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपदा जोखिम न्यूनीकरण के 10-सूत्री एजेंडे पर आधारित है। इसमें स्थानीय स्तर पर निवेश, तकनीक का उपयोग, विश्वविद्यालयों-शोध केंद्रों का नेटवर्क, मजबूत जोखिम डेटा और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर है।
2026-2030 के लिए नई कार्ययोजना बनी
बैठक में पिछले साल APDIM की गतिविधियों की समीक्षा हुई और 2026 की योजनाओं के साथ-साथ 2026-2030 की रणनीतिक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई। इससे APDIM का पूरा कार्यक्रम निर्देशित होगा और सेंडाई फ्रेमवर्क तथा सतत विकास के 2030 एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कई देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल
बैठक में बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, कजाकिस्तान, मंगोलिया और तुर्की के प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने हिस्सा लिया। ताजिकिस्तान ने पर्यवेक्षक के रूप में शिरकत की। UN ESCAP के प्रशासन निदेशक स्टीफन कूपर, APDIM की निदेशक लेटिजिया रोसानो, वरिष्ठ समन्वयक मोस्तफा मोहंगेघ और सचिवालय के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
क्षेत्रीय सहयोग को मिली नई मजबूती
बैठक का समापन सभी देशों के साझा संकल्प के साथ हुआ कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आपदा जोखिम कम करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को और बढ़ाया जाएगा और नवाचारी रणनीतियों को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा। भारत की सक्रिय भूमिका और प्रधानमंत्री के विजन से क्षेत्र के देशों को मजबूत आपदा प्रबंधन ढांचा बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।



