नई दिल्ली। अमेरिका के साथ वेनेजुएला का तनाव बढ़ गया है। अमेरिका की सेना ने काराकस में एयर स्ट्राइक की, जिसके बाद पूरे शहर में कई विस्फोट हुए और अफरा-तफरी मच गई। एयर स्ट्राइक के बाद अमेरिका ने बड़ा दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया गया है। दोनों इस समय अमेरिका के कब्जे में हैं।
तेल से भरपूर, फिर भी बदहाल वेनेजुएला
अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक चर्चा में आ गया है। खास बात यह है कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, इसके बावजूद वह दुनिया के सबसे गरीब देशों में गिना जाता है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 तक वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल तेल का प्रमाणित भंडार मौजूद था। इसके बावजूद देश कच्चे तेल के निर्यात से बेहद कम कमाई कर पा रहा है।
वेनेजुएला के बाद सऊदी अरब का नंबर
तेल भंडार के मामले में वेनेजुएला के बाद सऊदी अरब दूसरे स्थान पर है, जिसके पास 267.2 अरब बैरल तेल है। इसके बाद ईरान (208.6 अरब बैरल) और कनाडा (163.6 अरब बैरल) का नंबर आता है। ये देश मिलकर दुनिया के आधे से अधिक तेल भंडार के मालिक हैं। तुलना करें तो अमेरिका के पास केवल करीब 55 अरब बैरल तेल भंडार है, जो वेनेजुएला से लगभग पांच गुना कम है। इसके बावजूद तेल से होने वाली आय में अमेरिका, वेनेजुएला से कहीं आगे है।
सस्ता क्यों बिकता है वेनेजुएला का तेल?
वेनेजुएला के अधिकांश तेल भंडार ओरिनोको बेल्ट में स्थित हैं, जहां भारी और अधिक घनत्व वाला कच्चा तेल पाया जाता है। इस तरह का तेल निकालना और उसे रिफाइन करना बेहद महंगा होता है। इसमें सल्फर की मात्रा भी अधिक होती है, जिस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत कम मिलती है। इसके अलावा देश की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए पर पूरे तेल उत्पादन की जिम्मेदारी है, लेकिन पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश की भारी कमी और अमेरिका व अन्य देशों द्वारा लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के कारणों से वेनेजुएला अपने विशाल तेल भंडार का पूरा लाभ नहीं उठा पाया।
अमेरिका-वेनेजुएला टकराव ने लिया खतरनाक मोड़
अमेरिका द्वारा किए गए इस सैन्य हमले और राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ़्तारी ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम का असर न सिर्फ लैटिन अमेरिका, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।



