नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के साथ अलास्का के जोइंट बेस एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन में 15 अगस्त को एक अहम मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल समिट का मकसद यूक्रेन में चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए एक सीजफायर डील तक पहुंचना था। हालांकि, मुलाकात के बाद कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। इस बीच, यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस इस मुलाकात का इस्तेमाल अपनी स्थिति मजबूत करने और नई रणनीति तैयार करने के लिए कर सकता है। साथ ही, ट्रंप ने ताइवान के मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हाल की बातचीत का जिक्र कर वैश्विक कूटनीति में नया मोड़ ला दिया।
ट्रंप-पुतिन समिट: क्या हुआ अलास्का में?
15 अगस्त को अलास्का में हुई इस मुलाकात को वैश्विक स्तर पर ‘हाई स्टेक्स’ मीटिंग के रूप में देखा जा रहा था। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि वह इस समिट में सीजफायर डील चाहते हैं और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह निराश होंगे। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया, जहां पुतिन ने दावा किया कि दोनों पक्षों ने यूक्रेन के मुद्दे पर कुछ ‘समझौतों’ पर सहमति जताई। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया, कोई डील तभी होगी जब डील पक्की होगी। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और नाटो नेताओं से बात करेंगे ताकि आगे की रणनीति बनाई जा सके। यूक्रेन, जिसे इस समिट में शामिल नहीं किया गया, ने चिंता जताई है कि रूस इस मुलाकात का फायदा उठाकर अपनी सैन्य रणनीति को और मजबूत कर सकता है। यूक्रेनी सैनिक आर्टेम रेशेटिलोव ने एनबीसी न्यूज को बताया, हमें रूस के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। यह दुश्मन रुकने वाला नहीं है। यूक्रेन का मानना है कि रूस सीजफायर का इस्तेमाल अपनी सेना को पुनर्गठन के लिए कर सकता है।
ताइवान पर ट्रंप का बड़ा खुलासा
इस समिट से ठीक पहले ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में ताइवान के मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी हालिया बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि शी ने उनसे कहा, जब तक आप व्हाइट हाउस में हैं, चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा। ट्रंप ने इस बात की सराहना की लेकिन साथ ही कहा, देखते हैं कि आगे क्या होता है। उन्होंने बताया कि शी ने धैर्य रखने की बात कही और चीन के धैर्यवान रुख को दोहराया। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि उनकी शी के साथ जून 2025 में बातचीत हुई थी, जिसकी पुष्टि उन्होंने सार्वजनिक रूप से की। इससे पहले अप्रैल में भी उन्होंने शी के साथ एक कॉल का जिक्र किया था, लेकिन उसका समय स्पष्ट नहीं किया था। यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब चीन और ताइवान के बीच तनाव चरम पर है।
चीन-ताइवान तनाव और अमेरिका की भूमिका
चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और बार-बार कहता रहा है कि वह इसे किसी भी कीमत पर अपने नियंत्रण में लेगा। दूसरी ओर, ताइवान खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र मानता है और चीन के दावों का विरोध करता है। वाशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने शुक्रवार को कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। उन्होंने अमेरिका से ‘एक चीन नीति’ का पालन करने और शांति के लिए ईमानदारी से काम करने की अपील की। हालांकि, अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है और उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन देता है। फिर भी, दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ट्रंप का यह बयान कि शी ने ताइवान पर हमले से इनकार किया है, वैश्विक कूटनीति में एक नया टर्निंग पॉइंट हो सकता है, लेकिन इसकी सत्यता और दीर्घकालिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं हैं।
यूक्रेन की चिंता और वैश्विक प्रभाव
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस समिट से पहले एक वीडियो संदेश में कहा, हमें उम्मीद है कि अमेरिका रूस के खिलाफ मजबूत रुख अपनाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि रूस के पास युद्ध खत्म करने का कोई इरादा नहीं दिखता। यूरोपीय देश भी इस मुलाकात को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि ट्रंप और पुतिन मिलकर यूक्रेन की अनुपस्थिति में कोई ऐसा समझौता न कर लें जो यूक्रेन के हितों को नुकसान पहुंचाए। रूस ने हाल ही में यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में सैन्य बढ़त हासिल की है, जिसे विश्लेषकों ने पुतिन की रणनीति का हिस्सा माना है। ट्रंप ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, पुतिन इसे अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यह उनकी डील को कमजोर करता है।
क्या है अगला कदम?
अलास्का समिट में कोई ठोस डील न होने से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ गई है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह जल्द ही जेलेंस्की और पुतिन के साथ एक दूसरी मुलाकात आयोजित कर सकते हैं। दूसरी ओर, यूक्रेन और यूरोप इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कोई भी समझौता बिना यूक्रेन की सहमति के नहीं होना चाहिए। ताइवान के मुद्दे पर ट्रंप का बयान और शी के साथ उनकी बातचीत ने वैश्विक भू-राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। क्या पुतिन और ट्रंप की यह मुलाकात रूस को नई रणनीति बनाने का मौका देगी, या क्या शी का धैर्य वाकई ताइवान के लिए शांति की गारंटी है? आने वाले दिन इन सवालों के जवाब देंगे।
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मुख्य बिंदु:
ट्रंप-पुतिन समिट: अलास्का में कोई सीजफायर डील नहीं, लेकिन ट्रंप ने इसे ‘उत्पादक’ बताया।
यूक्रेन का दावा: रूस इस मुलाकात का फायदा अपनी सैन्य रणनीति के लिए उठा सकता है।
ताइवान पर खुलासा: ट्रंप का दावा, शी जिनपिंग ने कहा कि वह उनके कार्यकाल में ताइवान पर हमला नहीं करेंगे।
वैश्विक चिंता: यूक्रेन और यूरोप को डर, कहीं ट्रंप-पुतिन डील से यूक्रेन का नुकसान न हो।
आगे की राह: ट्रंप ने जेलेंस्की और पुतिन के साथ दूसरी मुलाकात का संकेत दिया।



