नई दिल्ली: 15 अगस्त की शाम अलास्का (Alaska Meeting) पूरी दुनिया की सुर्खियों में रहा, जब अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) एक मंच पर आमने-सामने बैठे। दोनों नेताओं की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी। हालांकि, यह बैठक किसी बड़े समझौते पर खत्म नहीं हुई, लेकिन इसे वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
तीन घंटे चली मुलाकात, 12 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस
अमेरिका और रूस (America-Russia) के बीच यह अहम बैठक करीब तीन घंटे तक चली। इसके बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से सिर्फ 12 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस की और फिर वहां से चले गए। ट्रंप ने मीडिया को संक्षिप्त बयान देते हुए कहा कि बातचीत “सार्थक” रही, हालांकि कोई डील अभी तय नहीं हो सकी।
मीडिया के तीखे सवाल और नेताओं की चुप्पी
अलास्का में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान विदेशी पत्रकारों ने एक के बाद एक तीखे सवाल दागे। एक पत्रकार ने पूछा, “आप आम नागरिकों की मौत कब रोकेंगे?” दूसरे ने सवाल किया, “क्या ट्रंप पर उनके अपने वादों के लिए भरोसा किया जा सकता है?”
इन सवालों पर ट्रंप और पुतिन दोनों ने चुप्पी साधी। पुतिन ने तो ऐसा दिखाया मानो उन्होंने सवाल सुना ही न हो। वहीं, ट्रंप ने अंत में सिर्फ “धन्यवाद” कहकर प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर दी।
पुतिन का गुस्सा और मीडिया पर चिल्लाना
रूसी राष्ट्रपति पुतिन (Vladimir Putin) आमतौर पर प्रेस के तीखे सवालों का सामना करने से बचते हैं। लेकिन इस बार अलास्का में लगातार पूछे गए सवालों से वे झल्ला उठे और ऊंची आवाज में जवाब दिया। पुतिन की यह प्रतिक्रिया वहां मौजूद सभी पत्रकारों के लिए अप्रत्याशित थी। दूसरी ओर, ट्रंप पूरे समय शांत और संयमित दिखाई दिए।
सीजफायर की कोशिशें
रूस-यूक्रेन युद्ध को अब तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं। इस दौरान लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों नागरिकों की जान जा चुकी है। ट्रंप इस युद्ध में सीजफायर (Ceasefire) करवाने की कोशिश कर रहे हैं। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि पुतिन के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही और अब वे जल्द ही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और NATO नेताओं से चर्चा करेंगे।
अगली मुलाकात मॉस्को में
मुलाकात के दौरान पुतिन ने ट्रंप को रूस की राजधानी मॉस्को आने का निमंत्रण दिया। इसका मतलब है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। हालांकि, वैश्विक राजनीति के जानकार मानते हैं कि इस मुलाकात का वास्तविक असर तभी सामने आएगा, जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध विराम की दिशा में ठोस कदम उठेंगे।
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अलास्का में हुई ट्रंप-पुतिन मुलाकात ने भले ही कोई बड़ा समझौता नहीं कराया हो, लेकिन इससे यह साफ हो गया कि कूटनीतिक कोशिशें अभी जारी हैं। मीडिया के सवालों, पुतिन की झल्लाहट और ट्रंप की चुप्पी ने इस मुलाकात को और भी चर्चा का विषय बना दिया। अब दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या आने वाले महीनों में यह बातचीत यूक्रेन युद्ध के अंत की दिशा में कोई ठोस रास्ता खोल पाएगी।



