नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को निशाने पर लिया है। Truth Social पर किए गए ताज़ा पोस्ट्स में उन्होंने भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को “मृत” बताया और पाकिस्तान के साथ अमेरिका की बड़ी ऑयल डील की घोषणा की। Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के इस बयान ने दक्षिण एशिया की ऊर्जा राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।
पाकिस्तान के साथ अमेरिकी ऑयल डील
डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर लिखा, “हमने अभी-अभी पाकिस्तान के साथ एक डील की है, जिसके तहत अमेरिका और पाकिस्तान मिलकर वहां के विशाल ऑयल रिजर्व्स का विकास करेंगे।” उन्होंने कहा कि एक अमेरिकी तेल कंपनी इस योजना का नेतृत्व करेगी। साथ ही यह भी जोड़ा की, “शायद एक दिन वे भारत को भी तेल बेचेंगे!”
भारत-रूस व्यापार पर ट्रंप की नाराजगी
ट्रंप ने भारत और रूस की साझेदारी को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “मुझे फर्क नहीं पड़ता कि भारत रूस के साथ क्या करता है। वे अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को साथ लेकर डूब सकते हैं।” ट्रंप ने भारत पर उच्च टैरिफ और अमेरिका के साथ सीमित व्यापार का आरोप लगाया।
भारत की तेल ज़रूरतें और आपूर्तिकर्ता
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरतों का करीब 88% आयात करता है। अभी रूस भारत को 40% से अधिक तेल सप्लाई करता है, जबकि इराक, सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका भी भारत के लिए तेल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।
अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया
अमेरिका ने भारत से होने वाले कुछ प्रमुख आयातों पर 25% टैरिफ लगाने का एलान किया है। यह टैरिफ विशेष रूप से स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स पर लागू हुआ है। अमेरिका ने यह कदम ‘America First’ नीति और घरेलू उद्योग को सुरक्षा देने के लिए उठाया है। इससे भारत के $10 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत ने इस फैसले को “अनुचित और संरक्षणवादी” बताया है।
क्या पाकिस्तान बन सकता है तेल सप्लायर?
पाकिस्तान की घरेलू तेल उत्पादन क्षमता सीमित है और अभी वह अपने अधिकांश ऊर्जा स्रोतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अगर अमेरिका के सहयोग एवं निवेश से पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर ऑयल एक्सप्लोरेशन होता है, तो यह दक्षिण एशिया की ऊर्जा राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने न सिर्फ भारत-अमेरिका रिश्तों में नई बहस छेड़ दी है, बल्कि भारत-रूस ऊर्जा साझेदारी को लेकर भी वैश्विक मंच पर हलचल पैदा की है। क्या पाकिस्तान वाकई भारत के लिए तेल आपूर्तिकर्ता बन पाएगा या यह सिर्फ चुनावी बयानबाजी है-यह देखना दिलचस्प होगा।



