नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) ने अपने शैक्षणिक ढांचे में एक अहम बदलाव करते हुए माइनर विषयों को चुनने के लिए अब अनिवार्य Generic Elective (GE) विषय लेने की शर्त को समाप्त कर दिया है। इस फैसले से विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों को राहत मिलेगी, खासकर उन छात्रों को जो UG (Undergraduate) के दौरान अपनी पसंद के माइनर विषय को चुनकर भविष्य में PG (Postgraduate) में उसी विषय में दाखिला लेना चाहते हैं।
पहले क्या था नियम?
साल 2022 में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने Undergraduate Curriculum Framework (UGCF) लागू किया था, जिसके तहत छात्रों को मेजर (मुख्य विषय) के साथ-साथ माइनर (अतिरिक्त विषय) चुनने की सुविधा दी गई थी। लेकिन किसी विषय को माइनर के रूप में मान्यता प्राप्त करवाने के लिए छात्रों को उस विषय से जुड़े कम से कम तीन अनिवार्य Generic Electives पढ़ने होते थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य छात्रों को एक मजबूत अकादमिक आधार देना और माइनर विषय में भी उनकी जानकारी को गहराई से विकसित करना था। प्रत्येक विभाग ने अपने-अपने GE विषयों की एक सूची तैयार की थी, जिनमें से छात्रों को कम से कम तीन चुनने अनिवार्य थे। शेष चार GE विषय छात्र किसी भी अनुशासन से ले सकते थे।
CUET के चलते बदली दिशा
हाल के वर्षों में CUET (Common University Entrance Test) के माध्यम से DU में दाखिला प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है। अब स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए छात्रों को प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है, जिसमें उनके ज्ञान का मूल्यांकन किया जाता।यह नियम अब व्यावहारिक नहीं रह गया था।इसके अलावा यह निर्णय छात्रों पर अनावश्यक अकादमिक दबाव को कम करने और उन्हें अपनी पसंद के अनुसार GE विषय चुनने की स्वतंत्रता देने के उद्देश्य से लिया गया है।
आधिकारिक अधिसूचना में क्या कहा गया है?
मंगलवार को जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना में यह साफ-साफ उल्लेख किया गया है कि:
- माइनर विषय को चुनने के लिए अब किसी विशेष Generic Elective (GE) विषय को पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। छात्र GE विषयों की समग्र सूची में से अपनी पसंद के अनुसार किसी भी विषय का चयन कर सकते हैं और उस आधार पर स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में आवेदन कर सकते हैं।
- यह अधिसूचना विश्वविद्यालय की वेबसाइट के माध्यम से सभी विभागों, कॉलेजों और छात्रों को भेजी जा चुकी है।
छात्रों और शिक्षकों की क्या है प्रतिक्रिया?
छात्रों ने इस बदलाव का स्वागत किया है। कई छात्रों का मानना है कि यह नियम उनके पाठ्यक्रम को ज्यादा लचीला और रुचिकर बनाएगा। पहले उन्हें किसी एक माइनर को पाने के लिए ज़बरदस्ती कुछ GE विषय पढ़ने पड़ते थे, जो उनकी रुचि के अनुकूल नहीं होते थे।छात्र इस फैसले से काफी खुश और संतुष्ट नज़र आ रहे हैं।
निष्कर्ष
DU द्वारा माइनर विषयों के लिए GE की अनिवार्यता हटाने का फैसला छात्रों के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम है। यह निर्णय न केवल पाठ्यक्रम को अधिक लचीला बनाता है, बल्कि छात्रों को अपनी रुचियों और भविष्य की योजना के अनुरूप विषय चुनने की स्वतंत्रता भी देता है।CUET जैसी परीक्षा प्रणाली पहले ही छात्रों के ज्ञान और योग्यता की जांच करती है, ऐसे में अनावश्यक प्रतिबंध हटाना विश्वविद्यालय के शिक्षा दृष्टिकोण को अधिक व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाता है।



