SCO शिखर सम्मेलन: मोदी, जिनपिंग और पुतिन की मुलाकात पर वैश्विक नजरें

इस मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के इस आयोजन को और महत्वपूर्ण बना दिया है। खासकर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टैरिफ नीतियों से भारत-अमेरिका संबंधों में आए तनाव के बाद, यह सम्मेलन भारत-चीन और भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने का अवसर प्रदान कर सकता है।

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नई दिल्ली: चीन के तियानजिन में आज से शुरू होने वाला शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। इस मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी ने इस आयोजन को और महत्वपूर्ण बना दिया है। खासकर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टैरिफ नीतियों से भारत-अमेरिका संबंधों में आए तनाव के बाद, यह सम्मेलन भारत-चीन और भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने का अवसर प्रदान कर सकता है।

31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगा सम्मेलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को आयोजित इस एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को तियानजिन पहुंचे। यह उनकी सात साल बाद पहली चीन यात्रा है। इससे पहले वह जून 2018 में एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए चीन गए थे। इस बार का सम्मेलन वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है।

भारत-चीन संबंधों में नई गर्मजोशी की उम्मीद

भारत और चीन के बीच संबंधों में 2020 की गलवन घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद तनाव देखा गया था। हालांकि, हाल के महीनों में दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग ई की भारत यात्रा इस दिशा में एक सकारात्मक कदम थी। इस सम्मेलन में रविवार को होने वाली प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग की द्विपक्षीय बैठक से दोनों देशों के बीच व्यापार और सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर सार्थक चर्चा की उम्मीद है।

ट्रंप की टैरिफ नीतियों का असर

अमेरिका द्वारा भारत और चीन पर लगाए गए नए टैरिफ ने वैश्विक व्यापार में तनाव पैदा किया है। रूस पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव देखा जा रहा है। ऐसे में भारत और चीन अपने द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इस सम्मेलन में होने वाली चर्चाएं वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।

मोदी-पुतिन मुलाकात और यूक्रेन मुद्दा

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी विस्तृत बातचीत होने की संभावना है। इस मुलाकात से पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मोदी से फोन पर बात की। जेलेंस्की ने युद्धविराम की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसका समर्थन भारत ने किया। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ बातचीत में यूक्रेन में शांति और स्थिरता के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। हम मानवतावादी सहायता और संघर्ष समाधान के सभी प्रयासों का समर्थन करते हैं।

भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत की उम्मीद: चीनी राजदूत

भारत में चीनी राजदूत जू फीहोंग ने तियानजिन में प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में कहा कि उनकी यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में नई गति लाएगी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, प्रधानमंत्री मोदी का तियानजिन में हार्दिक स्वागत है। यह यात्रा भारत-चीन संबंधों को और मजबूत करेगी।

वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका

एससीओ शिखर सम्मेलन न केवल भारत-चीन और भारत-रूस संबंधों के लिए, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह मंच क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाने का अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करती है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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