आरा: बिहार में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने खुद को INDI गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित कर दिया है। यह घोषणा उन्होंने आरा में शनिवार को हुई एक रैली के दौरान की, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी उनके साथ मंच पर मौजूद थे।
घोषणा का समय और महत्व
तेजस्वी यादव की यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रही 15 दिनों की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ अपने अंतिम चरण में है और इसका समापन 1 सितंबर को पटना में होने वाला है। इस यात्रा के दौरान जब पत्रकारों ने राहुल गांधी से यह सवाल पूछा था कि क्या कांग्रेस तेजस्वी यादव को बिहार में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार मानती है, तो राहुल गांधी ने इसका सीधा जवाब नहीं दिया था। इस पृष्ठभूमि में तेजस्वी की यह घोषणा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह INDIA गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर एक अनकही सहमति या टकराव को दर्शा सकती है।
रैली में तेजस्वी का बयान
आरा की रैली में तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उनकी सरकार को “कॉपीकैट सरकार” बताया। उन्होंने भीड़ से पूछा, “असली मुख्यमंत्री चाहिए या डुप्लीकेट?” और भीड़ की प्रतिक्रिया पर खुद को ‘असली’ मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा किए गए वादे, जैसे रोजगार, डोमिसाइल नीति और सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि, को बाद में नीतीश सरकार ने अपना लिया, लेकिन उनमें दूरदर्शिता की कमी है।
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मोदी सरकार पर हमला
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला और उनके वादों को “कागज के हवाई जहाज” कहा जो जमीन पर नहीं टिकते। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने वोट के अधिकार की रक्षा करें ताकि बिहार में बदलाव लाया जा सके।
रोहिणी आचार्य का जवाब
इस घोषणा के बाद जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बेटी और तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य से कांग्रेस द्वारा तेजस्वी को सीएम चेहरा घोषित न करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा, “शादी ही नहीं हुई और आप लोग सुहागरात की बात कर रहे हैं। अभी हमारी प्राथमिकता लोगों को वोट का अधिकार दिलाना है।” यह बयान इस बात का संकेत देता है कि भले ही तेजस्वी ने खुद को सीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया हो, लेकिन गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर अभी पूरी तरह से सहमति नहीं बनी है।
तेजस्वी यादव का उदय
बिहार में नीतीश कुमार के बीजेपी से अलग होकर महागठबंधन में शामिल होने के बाद, तेजस्वी यादव एक मजबूत नेता के रूप में उभरे हैं। उन्होंने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला और सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका रही। 2020 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर एक मजबूत चुनौती पेश की थी, और उनकी पार्टी RJD सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
नीतीश कुमार और गठबंधन का नेतृत्व
नीतीश कुमार के महागठबंधन में लौटने के बाद यह सवाल बार-बार उठ रहा था कि अगले विधानसभा चुनाव में गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा। हालांकि, नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर INDI गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे यह कयास लगाए जाने लगे कि वे बिहार की राजनीति से हटकर केंद्र की राजनीति में अधिक रुचि ले रहे हैं।
कांग्रेस की स्थिति
बिहार में कांग्रेस एक छोटी सहयोगी पार्टी है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर वह INDI गठबंधन का एक प्रमुख हिस्सा है। राहुल गांधी की मौजूदगी में तेजस्वी का खुद को CM चेहरा घोषित करना महत्वपूर्ण है। यह दिखाता है कि RJD, जो बिहार में सबसे बड़ी पार्टी है, कांग्रेस से इस मुद्दे पर खुलकर समर्थन चाहती है।
राहुल गांधी की गोलमोल प्रतिक्रिया
जब राहुल गांधी से पहले यह सवाल पूछा गया था कि क्या कांग्रेस तेजस्वी को CM कैंडिडेट मानती है, तो उनका सीधा जवाब न देना इस बात का संकेत था कि कांग्रेस अभी इस मुद्दे पर खुलकर कोई बयान नहीं देना चाहती। संभव है कि कांग्रेस चाहती हो कि गठबंधन के सभी घटक मिलकर यह फैसला लें।
तेजस्वी की घोषणा का मकसद
दबाव की रणनीति
तेजस्वी का राहुल गांधी की मौजूदगी में खुद को CM उम्मीदवार घोषित करना एक तरह की दबाव की राजनीति है। वह कांग्रेस और गठबंधन के अन्य दलों पर यह संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें ही अगले चुनाव में मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट किया जाना चाहिए।
संदेश साफ करना
यह घोषणा कार्यकर्ताओं और जनता के बीच भी एक साफ संदेश देने की कोशिश है कि बिहार में RJD का नेतृत्व तेजस्वी यादव के हाथ में है और वह ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं।
कुल मिलाकर, यह खबर बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले INDI गठबंधन के भीतर नेतृत्व और मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान को दर्शाती है। यह दिखाता है कि भले ही गठबंधन एकजुट है, लेकिन सीटों के बंटवारे और नेतृत्व जैसे मुद्दों पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।



