नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांति का नोबेल प्राइज नहीं मिला है। ट्रंप कई महीनों से इस पुरस्कार के लिए बेचैन दिख रहे थे। पाकिस्तान और इजरायल ने तो उनका समर्थन तक किया लेकिन फिर भी नोबेल कमेटी ने उन्हें यह सम्मान नहीं दिया। इसे लेकर अब व्हाइट हाउस की तरफ से प्रतिक्रिया आई है।
राजनीति के चक्कर में कमेटी
व्हाइट हाउस ने कहा है कि नोबेल कमेटी ने एक बार फिर से ये साबित किया है कि वो शांति के बदले राजनीति को अहमियत देते हैं। दरअसल डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से खुद के लिए कह रहे थे कि नोबेल पीस प्राइज उन्हें ही मिलना चाहिए। उन्होंने कई जंग रुकवाए हैं। ट्रंप कई बार सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि वो भारत-पाकिस्तान समेत 7 जंग रुकवा चुके हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जंग खत्म होते ही ये आंकड़ा बढ़कर 8 हो जाएगा।
मारिया को मिला नोबेल
आपको बता दें कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो को साल 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। उन्हें वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। नोबेल पुरस्कार समिति का कहना है कि सत्ताधरी पार्टी के तानाशाही शासन के कारण वेनेजुएला में राजनीतिक कार्य बेहद कठिन है। मचाडो ने सुमाते नामक संगठन की स्थापना की है, जो लोकतंत्र की बेहतरी के लिए काम करता है। वह देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की मांग करती रही हैं। मारिया मचाडो को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना यानी 10.3 करोड़ रुपए मिलेंगे।
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क्या होता है नोबेल पुरस्कार
नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1895 में हुई थी, जब वैज्ञानिक और आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में इसका जिक्र किया। पहला नोबेल पुरस्कार 1901 में दिया गया था। 1901 से 2024 तक मेडिसिन (चिकित्सा) के क्षेत्र में 229 लोगों को यह सम्मान मिल चुका है। शुरू में ये पुरस्कार सिर्फ भौतिकी (Physics), रसायन (Chemistry), मेडिसिन, साहित्य (Literature) और शांति (Peace) के क्षेत्र में दिए जाते थे। बाद में इकोनॉमिक्स (अर्थशास्त्र) के लिए भी नोबेल पुरस्कार शुरू किया गया।



