नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Modi) ने 8 अगस्त 2025 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ टेलीफोन पर विस्तृत चर्चा की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच विशेष और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया, जिससे कुल शुल्क 50% हो गया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन के साथ बहुत अच्छी और विस्तृत बातचीत हुई। मैंने यूक्रेन के ताजा हालात पर जानकारी साझा करने के लिए उनका आभार जताया। हमने द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने और भारत-रूस की विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया। मैं इस साल के अंत में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा का इंतजार कर रहा हूं।”
डोभाल की मॉस्को यात्रा और पुतिन से मुलाकात
इस फोन कॉल से ठीक एक दिन पहले, 7 अगस्त 2025 को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मॉस्को में क्रेमलिन में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की थी। इस दौरान रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और भारत के राजदूत विनय कुमार भी मौजूद थे। डोभाल ने भारत-रूस संबंधों को “विशेष और ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी समय की कसौटी पर खरी उतरी है। उन्होंने पुतिन की आगामी भारत यात्रा की तैयारियों पर भी चर्चा की और बताया कि इस दौरे की तारीखें लगभग तय हो चुकी हैं।
पुतिन की भारत यात्रा की पुष्टि
राष्ट्रपति पुतिन इस साल के अंत में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे। पीएम मोदी ने इस दौरे के लिए न्योता दिया, जिसे पुतिन ने स्वीकार कर लिया है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच सालाना शिखर सम्मेलन की परंपरा का हिस्सा है। डोभाल ने मॉस्को में कहा, “हमारी साझेदारी बहुत मजबूत है, और हम अपने नेताओं के बीच नियमित उच्च-स्तरीय संवाद को महत्व देते हैं।” यह दौरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्कों के बाद हो रहा है, जिसे भारत ने “अनुचित और अन्यायपूर्ण” करार दिया है।
भारत-रूस संबंध और वैश्विक चुनौतियां
यह फोन कॉल अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए 50% शुल्क के बाद हुई, जो रूस से तेल आयात को लेकर लगाया गया था। भारत ने स्पष्ट किया कि उसका तेल आयात बाजार की परिस्थितियों और 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। भारत रूस से प्रतिदिन लगभग 17.8 लाख बैरल तेल आयात कर रहा है, जो 2023 में 20 लाख बैरल प्रतिदिन के उच्च स्तर से कुछ कम है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान और हितों पर आधारित हैं, जो वैश्विक बहुध्रुवीय व्यवस्था में साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।
पुतिन की विदेश यात्राओं पर ICC का प्रभाव
मार्च 2023 में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा पुतिन के खिलाफ यूक्रेन में युद्ध अपराधों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद से उनकी विदेश यात्राएं सीमित हो गई हैं। इसके कारण वे 2023 में भारत में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हुए थे। हालांकि, भारत ICC का सदस्य नहीं है और इस वारंट को मान्यता नहीं देता। इसलिए, पुतिन की भारत यात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इस साल के अंत में ब्राजील में होने वाले G20 सम्मेलन में भी उनकी भागीदारी अनिश्चित है।
2024 में भारत-रूस संबंधों की प्रगति
पिछले साल पीएम मोदी ने दो बार रूस की यात्रा की थी—जुलाई में 22वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए और अक्टूबर में कजान में BRICS शिखर सम्मेलन के लिए। इन यात्राओं ने दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया। रूस ने हाल के महीनों में भारत के प्रति समर्थन दिखाया है, जिसमें अहमदाबाद में विमान दुर्घटना और पहलगाम में आतंकी हमले के बाद शोक संदेश शामिल हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति
यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब पीएम मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना है। रूस और चीन के साथ भारत के मजबूत संबंध वैश्विक मंच पर उसकी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करते हैं।



