पाक संसद में गरमा-गर्मी, सेना प्रमुख की भूमिका पर उठे सवाल

पाकिस्तान में सेना प्रमुख असीम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ की ट्रंप संग तस्वीर ने राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ बताया। 

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नई दिल्ली: पाकिस्तान की राजनीति में नया विवाद उस वक्त खड़ा हो गया जब सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई। इस तस्वीर में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर (Asim Munir) और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif), पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से वॉशिंगटन स्थित ओवल ऑफिस में मुलाकात करते नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि तस्वीर में मुनीर ट्रंप को पाकिस्तान के दुर्लभ खनिजों से भरा एक डिब्बा भेंट करते दिख रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री शहबाज पास खड़े मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर ने पाकिस्तान (Pakistan Politics)  के भीतर राजनीतिक भूचाल ला दिया है।

‘सेल्समैन’ की उपाधि ने बढ़ाया विवाद

इस घटना के बाद पाकिस्तान की संसद में गरमा-गरम बहस छिड़ गई। अवामी नेशनल पार्टी (ANP) के नेता और सांसद ऐमल वली खान ने सेना प्रमुख असीम मुनीर को ‘सेल्समैन’ तक कह डाला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुनीर का यह रवैया देश की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। वहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर भी तंज कसते हुए कहा कि वे “सिर्फ एक मैनेजर की तरह खड़े तमाशा देख रहे थे”।

‘संविधान के साथ मजाक’ का आरोप

ऐमल वली खान ने संसद में कहा कि सेना प्रमुख किस हैसियत से विदेशी नेताओं को पाकिस्तान के खनिजों का प्रदर्शन कर रहे हैं? यह काम निर्वाचित सरकार और विदेश मंत्रालय का होता है। उन्होंने इसे पाकिस्तान के संविधान के साथ मजाक और लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान करार दिया।

संसद का संयुक्त सत्र बुलाने की मांग

इस मुद्दे को लेकर ऐमल वली खान ने संसद का संयुक्त सत्र बुलाने की मांग की। उनका कहना था कि इसमें तीन अहम सवालों पर स्पष्टीकरण मिलना चाहिए:

1. पाकिस्तान द्वारा ट्रंप की शांति योजना के लिए समर्थन की हकीकत।
2. सऊदी अरब के साथ कथित रक्षा सौदे के ब्योरे।
3. सेना प्रमुख द्वारा राजनयिक स्तर की बातचीत करने का औचित्य।

तीसरी वॉशिंगटन यात्रा पर भी उठे सवाल

गौरतलब है कि असीम मुनीर की यह वाशिंगटन यात्रा पिछले छह महीने में तीसरी बार हुई है। विपक्ष का कहना है कि बार-बार की ये यात्राएं सेना की विदेश नीति में बढ़ती दखलअंदाजी को दर्शाती हैं। जबकि सरकार और सेना की ओर से इस पर अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

घरेलू राजनीति में बढ़ा दबाव

इस पूरे विवाद ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है। एक ओर विपक्ष सरकार और सेना पर मिलीभगत का आरोप लगा रहा है, वहीं आम जनता सोशल मीडिया पर सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री की भूमिका पर सवाल उठा रही है।

पाकिस्तान में सेना और सरकार के रिश्ते पहले से ही विवादों के घेरे में रहते हैं। अब ‘खनिज डिप्लोमेसी’ की यह तस्वीर न केवल पाकिस्तानी राजनीति में नई बहस छेड़ गई है, बल्कि सेना की भूमिका और लोकतंत्र के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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