मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने शनिवार को एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया, जब यमन से इसराइल पर मिसाइल हमला किया गया। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किए हुए एक महीना बीत चुका है।
यमन के उत्तरी हिस्सों पर नियंत्रण रखने वाले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। इसराइली डिफेंस फोर्स (IDF) ने बताया कि उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने सभी मिसाइलों को बीच में ही रोक लिया, जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ।
हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने इसराइल के “रणनीतिक सैन्य ठिकानों” को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि यह हमला ईरान, लेबनान, इराक और फिलिस्तीनी इलाकों पर हो रहे हमलों के जवाब में किया गया है। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक “प्रतिरोधी मोर्चों” पर हमले बंद नहीं होते, तब तक उनके हमले जारी रहेंगे।
संघर्ष का दायरा बढ़ा, नए युद्ध का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि हूती विद्रोहियों के सीधे तौर पर इस संघर्ष में शामिल होने से युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है। इससे अरब प्रायद्वीप में एक नया मोर्चा खुलने का खतरा पैदा हो गया है।
शनिवार को ही खाड़ी के कई देशों—सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान—ने भी अपनी सीमाओं की ओर बढ़ रहे ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया।
अबू धाबी में एक इंटरसेप्ट किए गए मिसाइल के मलबे से पांच भारतीय नागरिक घायल हो गए, जबकि कुवैत में ड्रोन हमले से एयरपोर्ट के रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा।
आर्थिक संकट का खतरा और बढ़ा
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हूती विद्रोही रेड सी (लाल सागर) के पास अहम इलाकों पर नियंत्रण रखते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है।
पहले भी हूती हमलों के कारण जहाजों को लंबा और महंगा रास्ता—केप ऑफ गुड होप—से गुजरना पड़ा था, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी।
अब हालात और गंभीर इसलिए हो गए हैं क्योंकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर दबाव बढ़ा दिया है, जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
इसराइल और ईरान के बीच हमले तेज
इसराइल ने भी लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं और ईरान के भीतर भी बमबारी जारी रखी है। तेहरान में कई जगह धमाकों की खबरें सामने आई हैं।
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है और ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन मौजूदा हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाएं संकेत देती हैं कि यह टकराव अब और व्यापक और खतरनाक रूप ले सकता है।



