मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव और हालिया सीजफायर के बीच उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय सियासत में हलचल मचा दी है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के वंशज डॉ. रेहान काजमी ने अमेरिका को ‘हारा हुआ देश’ बताते हुए पाकिस्तान पर भी तीखा हमला बोला है। उनका दावा है कि सीजफायर अमेरिका की मजबूरी है, न कि रणनीतिक जीत।
अमेरिका हारा, ईरान बना सुपर पावर
डॉ. रेहान काजमी के मुताबिक, किसी भी जंग की असली जीत मकसद हासिल करने से तय होती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन और संसाधनों पर नियंत्रण था, जिसमें वह पूरी तरह असफल रहा।
काजमी का दावा है कि ईरान ने अपनी शर्तों पर अमेरिका को झुकाया और गाजा, फिलिस्तीन व लेबनान से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात मनवाई।

पाकिस्तान पर तीखा हमला
काजमी ने पाकिस्तान को ‘अमेरिका का गुलाम’ बताते हुए कहा कि वह अपनी स्वतंत्र नीति से नहीं, बल्कि वॉशिंगटन के इशारों पर काम करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान इस वार्ता में इसलिए शामिल हुआ ताकि अमेरिका सीधे ईरान से बातचीत कर अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि खराब न करे।
आतंक और पैसों की राजनीति
डॉ. काजमी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान अमेरिका से पैसे लेकर अपने यहां आतंकवाद को बढ़ावा देता है और क्षेत्र में अशांति फैलाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान इस मौके का इस्तेमाल खुद को ‘विश्व गुरु’ दिखाने के लिए कर रहा है, जबकि उसकी असलियत दुनिया के सामने है।
इस्लामाबाद में सीजफायर वार्ता पर नजरें
फिलहाल, मिडिल ईस्ट संकट को लेकर इस्लामाबाद में सीजफायर वार्ता जारी है, जिसमें ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि इस वार्ता से क्या निष्कर्ष निकलता है और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ेगा। डॉ. रेहान काजमी के बयान ने एक बार फिर मिडिल ईस्ट की जंग को लेकर चल रही वैश्विक बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर सीजफायर को लेकर उम्मीदें हैं, वहीं दूसरी ओर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है।



