नई दिल्ली: ईरान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव और सैन्य हमलों के बावजूद अपने परमाणु कार्यक्रम (Iran Nuclear Program) को जारी रखने का निर्णय लिया है। देश के उप विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी और इजरायली हमलों से भले ही नुकसान हुआ हो, लेकिन ईरान पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका की चेतावनी-हर नई परमाणु साइट नष्ट कर देंगे
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दो टूक कहा है कि अगर ईरान कोई नई परमाणु सुविधा स्थापित करता है, तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जून में अमेरिका द्वारा किए गए हमलों में तीन परमाणु ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए थे और उन्हें फिर से चालू करने में कई साल लग सकते हैं।
यूरोपीय देशों से वार्ता की तैयारी
ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ता भी अपनाना चाहता है। इसी सिलसिले में ईरानी अधिकारी इस हफ्ते तुर्किये में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे। इस वार्ता में यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास की मौजूदगी भी तय मानी जा रही है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि इन बैठकों का उद्देश्य प्रतिबंधों को हटाने और ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु अधिकारों पर स्पष्टता लाना है।
इजरायल-ईरान टकराव में अमेरिका की एंट्री
13 जून को शुरू हुए सैन्य संघर्ष में इजरायल ने पहले ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया। इस टकराव ने गंभीर रूप ले लिया जब अमेरिका ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर बमबारी की।
करीब 12 दिनों तक चले इस टकराव ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता को और गहरा कर दिया है। इजरायल को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार बनाकर उसके खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है, जबकि ईरान अपने कार्यक्रम को ऊर्जा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए शांतिपूर्ण बता रहा है।
अब दुनिया की नजरें तुर्किये में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं, जिससे इस तनावपूर्ण स्थिति में कोई नया मोड़ आ सकता है।



