तेहरान/वाशिंगटन | ईरान में पिछले कई हफ्तों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन अब एक अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल गए हैं। नॉर्वे स्थित मानवाधिकार संगठन ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ (IHRNGO) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी शासन की दमनकारी कार्रवाई में अब तक 3,428 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। वहीं, 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मानवाधिकारों का भीषण उल्लंघन
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चला रहे हैं। अस्पतालों और मोर्चरी से मिली खबरों के अनुसार, 8 और 9 जनवरी को तेहरान और अन्य शहरों में सबसे भीषण हिंसा देखी गई। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि घायल प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर ही ‘खत्म’ किया जा रहा है और परिवारों को शव सौंपने के बदले भारी रकम वसूली जा रही है।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख: “मदद आ रही है”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए तेहरान को चेतावनी दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ईरानी नागरिकों के लिए मदद आ रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरानी शासन प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है, तो अमेरिका “कड़ी कार्रवाई” करेगा।
क्या अमेरिकी हमला होने वाला है?
बुधवार को वाशिंगटन से ऐसी खबरें आईं कि अमेरिका ईरान पर सैन्य हमला करने की तैयारी में है। हालांकि, व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए ट्रंप ने अपने तेवर थोड़े नरम किए। उन्होंने कहा:
“मुझे ‘दूसरी तरफ’ के महत्वपूर्ण सूत्रों से आश्वासन मिला है कि हत्याएं और फांसी की योजनाएं रोक दी गई हैं। हम प्रक्रिया पर नज़र रखेंगे और फिर फैसला करेंगे।”
ईरान की सफाई और अंतरराष्ट्रीय दबाव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने फांसी की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को ‘हैंग’ करने की कोई योजना नहीं है। लेकिन यूरोपीय अधिकारियों और इजरायली मीडिया का दावा है कि अमेरिका अभी भी सैन्य विकल्पों (Kinetic action) पर विचार कर रहा है, जिसमें ईरान के परमाणु केंद्रों या सुरक्षा तंत्र को निशाना बनाया जा सकता है।



