नई दिल्ली: भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने 24 जुलाई 2025 को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA), जिसे कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) कहा जाता है, पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह भारतीय कृषि, समुद्री उत्पादों, वस्त्रों, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, और अन्य प्रमुख क्षेत्रों को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करेगा। इससे भारत के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि और कई उत्पादों की कीमतों में कमी की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ:-
- शुल्क-मुक्त निर्यात: भारत के फल, सब्जियां, अनाज, मसाले (जैसे हल्दी, काली मिर्च, इलायची), और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (जैसे आम का गूदा, अचार, दालें) ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त करेंगे।
- 95% उत्पादों पर जीरो टैरिफ: भारत के 95% से अधिक कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा।
- निर्यात में 20% वृद्धि: अगले तीन वर्षों में कृषि निर्यात में 20% से अधिक की वृद्धि का अनुमान है, जो 2030 तक भारत के 100 अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य को समर्थन देगा।
- तकनीकी बाधाएं कम: व्यापार में तकनीकी बाधाओं (TBT) के प्रावधान प्रमाणीकरण प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे, जिससे निर्यातकों का समय और लागत बचेगी।
- नए बाजार के अवसर: कटहल, बाजरा, और जैविक जड़ी-बूटियों जैसे उभरते उत्पादों के लिए ब्रिटेन में नए बाजार खुलेंगे।
- संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित: डेयरी, सेब, जई, और खाद्य तेल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर भारत ने कोई शुल्क रियायत नहीं दी है।
- राज्यों को लाभ: महाराष्ट्र (अंगूर, प्याज), गुजरात (मूंगफली, कपास), पंजाब-हरियाणा (बासमती चावल), केरल (मसाले), और पूर्वोत्तर (बागवानी) के किसानों को विशेष लाभ होगा।
मत्स्य और समुद्री क्षेत्र में विस्तार;-
- शुल्क समाप्त: CETA समझौते के तहत ब्रिटेन में भारतीय समुद्री उत्पादों पर सभी टैरिफ खत्म हो जाएंगे।
- मछुआरों को फायदा: इससे तटीय मछुआरों की आय बढ़ेगी और निर्यातकों को बेहतर कीमत मिलेगी।
- बाजार अवसर: ब्रिटेन का 5.4 अरब डॉलर का समुद्री आयात बाजार भारत के लिए बड़ा अवसर है, जहां भारत की वर्तमान हिस्सेदारी केवल 2.25% है।
- झींगा और अन्य उत्पाद: झींगा (पहले 4.2%-8.5% टैरिफ), टूना, मछली का भोजन, और चारा अब शुल्क-मुक्त होंगे, जिससे इनके निर्यात में तेजी आएगी।
- आसान अनुपालन: स्वच्छता और पादप स्वच्छता (SPS) उपाय भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के मानकों को आसानी से पूरा करने में मदद करेंगे।
- चाय, कॉफी, और तिलहन को बढ़ावा
- निर्यात में उछाल: ब्रिटेन भारत के लिए चाय (5.6%), कॉफी (1.7%), और मसालों (2.9%) का प्रमुख बाजार है। शुल्क-मुक्त पहुंच से इनके निर्यात में तेज वृद्धि होगी।
- इंस्टेंट कॉफी को लाभ: शुल्क समाप्ति से भारतीय इंस्टेंट कॉफी यूरोपीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेगी।
- तिलहन की प्रतिस्पर्धा: कम शुल्क और सरल प्रक्रियाओं से भारतीय तिलहन निर्यातक ब्रिटेन में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
वस्त्र और परिधान में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त:-
- 1,143 उत्पादों पर जीरो टैरिफ: वस्त्र और परिधान क्षेत्र की 1,143 उत्पाद श्रेणियों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।
- प्रतिस्पर्धा में सुधार: पहले बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देशों को शुल्क लाभ मिलता था, लेकिन अब भारत की स्थिति मजबूत होगी।
- बाजार हिस्सेदारी बढ़ेगी: अगले दो वर्षों में ब्रिटेन के बाजार में भारत की हिस्सेदारी 5% तक बढ़ने की उम्मीद है।
- विकास के क्षेत्र: सिले सिलाए कपड़े, घरेलू वस्त्र, कालीन, और हस्तशिल्प में तेज वृद्धि होगी।
- इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, और सॉफ्टवेयर में उछाल
- इंजीनियरिंग निर्यात दोगुना: ब्रिटेन भारत का छठा सबसे बड़ा इंजीनियरिंग निर्यात बाजार है। 18% तक के टैरिफ खत्म होने से अगले पांच वर्षों में निर्यात 7.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
- प्रमुख उत्पाद: वाहन कलपुर्जे, विद्युत मशीनरी, औद्योगिक उपकरण, और निर्माण मशीनरी में 12-20% वार्षिक वृद्धि का अनुमान है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स में वृद्धि: स्मार्टफोन, ऑप्टिकल फाइबर केबल, और इनवर्टर जैसे उत्पादों के निर्यात में शुल्क-मुक्त पहुंच से तेजी आएगी।
- सॉफ्टवेयर और IT सेवाएं: ब्रिटेन की प्रतिबद्धताओं से भारतीय IT कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे, जिससे 2024-25 में 15-20% की वृद्धि संभव है।
फार्मास्यूटिकल्स और रसायन क्षेत्र में अवसर:-
- बाजार में विस्तार: ब्रिटेन के 30 अरब डॉलर के फार्मा आयात बाजार में भारत की हिस्सेदारी 1 अरब डॉलर से कम है, जो बढ़ने की बड़ी संभावना दर्शाता है।
- जेनेरिक दवाएं: शुल्क-मुक्त प्रावधानों से भारतीय जेनेरिक दवाओं की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
- चिकित्सा उपकरण: सर्जिकल उपकरण, ईसीजी मशीन, और एक्स-रे सिस्टम जैसे उत्पादों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
- रसायन निर्यात: 2025-26 तक रसायन निर्यात में 30-40% वृद्धि होकर 65-75 करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
- प्लास्टिक, खेल उत्पाद, रत्न-आभूषण, और चमड़ा क्षेत्र को लाभ
- प्लास्टिक निर्यात: प्लास्टिक फिल्म, शीट, पाइप, और किचनवेयर के निर्यात में 15% वृद्धि की उम्मीद है।
- खेल और खिलौने: फुटबॉल, क्रिकेट गियर, और गैर-इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों का निर्यात बढ़ेगा, जो चीन और वियतनाम के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी होगा।
- रत्न और आभूषण: ब्रिटेन के 3 अरब डॉलर के आभूषण आयात बाजार में भारत का निर्यात दोगुना हो सकता है।
- चमड़ा और जूते: 16% टैरिफ हटने से चमड़ा और जूता निर्यात 90 करोड़ डॉलर से अधिक हो सकता है, साथ ही 5% बाजार हिस्सेदारी बढ़ेगी।
सेवा क्षेत्र और नवाचार में प्रगति:-
- पेशेवरों की आसान आवाजाही: भारतीय पेशेवरों, जैसे योग प्रशिक्षक, शास्त्रीय संगीतकार, और शेफ, के लिए ब्रिटेन में काम करना आसान होगा।
- नवाचार को बढ़ावा: FTA का नवाचार अध्याय उभरती प्रौद्योगिकियों और नए उत्पादों में सहयोग को प्रोत्साहित करेगा।
- डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (DCC): भारतीय पेशेवरों को तीन वर्ष तक ब्रिटेन में सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट मिलेगी, जिससे उनकी लागत कम होगी।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य:-
- द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि: 2024 में 60 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 अरब डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य है।
- रोजगार सृजन: भारत में 10 लाख से अधिक नौकरियां सृजित होने की उम्मीद है, खासकर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में।
- उपभोक्ता लाभ: ब्रिटिश उत्पाद, जैसे कारें, व्हिस्की, और चॉकलेट, भारत में सस्ते होंगे, क्योंकि औसत शुल्क 15% से घटकर 3% हो जाएगा।
- यह FTA भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकरण के लक्ष्यों को मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करते हुए, यह समझौता आर्थिक विकास, नवाचार, और समृद्धि का नया अध्याय शुरू करेगा।



