भारत ने CoP30 में जलवायु न्याय की मांग दोहराई

ब्राजील के बेलेम में CoP30 लीडर्स समिट में भारत ने इक्विटी और CBDR-RC के आधार पर जलवायु कार्रवाई की प्रतिबद्धता जताई।

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नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNFCCC CoP30) के लीडर्स समिट में भारत ने अपनी मजबूत आवाज बुलंद की। 7 नवंबर 2025 को भारत के राजदूत दिनेश भाटिया ने कहा कि जलवायु कार्रवाई इक्विटी, राष्ट्रीय परिस्थितियों और CBDR-RC सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। भारत ने ब्राजील की मेजबानी और पेरिस समझौते की 10वीं वर्षगांठ पर बधाई दी।

रियो समिट की विरासत

भारत ने 1992 के रियो समिट को याद किया, जहां इक्विटी और CBDR-RC की नींव पड़ी। यही सिद्धांत पेरिस समझौते का आधार बने। भारत ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती पर सोचने का यह सही मौका है। दुनिया को एकजुट होकर न्यायसंगत समाधान निकालने चाहिए।

ब्राजील की पहल का स्वागत

भारत ने ब्राजील की ‘ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी’ (TFFF) पहल का स्वागत किया। यह उष्णकटिबंधीय जंगलों के संरक्षण के लिए वैश्विक प्रयास है। भारत ने इसमें ऑब्जर्वर के रूप में शामिल होने का फैसला किया। जंगल कार्बन सोखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

भारत का लो-कार्बन मॉडल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत कम कार्बन वाले विकास पर चल रहा है। 2005 से 2020 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता 36% घटी। नवीकरणीय ऊर्जा अब कुल क्षमता का 50% से ज्यादा है। भारत ने NDC लक्ष्य पांच साल पहले पूरा कर लिया। 2005-2021 के बीच 2.29 अरब टन CO₂ का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाया। 200 GW रिन्यूएबल क्षमता के साथ भारत दुनिया का तीसरा बड़ा उत्पादक है।

ग्लोबल पहलें

भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) की तारीफ की। अब 120+ देश इससे जुड़े हैं। यह सस्ती सौर ऊर्जा और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देता है। भारत जलवायु समाधान में नेतृत्व कर रहा है।

विकसित देशों पर दबाव

भारत ने कहा कि पेरिस समझौते के 10 साल बाद कई देश अपने NDC लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए। विकासशील देश मेहनत कर रहे हैं, लेकिन वैश्विक महत्वाकांक्षा कम है। कार्बन बजट तेजी से खत्म हो रहा है। विकसित देशों को उत्सर्जन तेजी से कम करना चाहिए और वादा किया गया वित्तीय-पैकेजीय समर्थन देना चाहिए।

विकासशील देशों की जरूरत

भारत ने जोर दिया कि विकासशील देशों को सस्ता वित्त, तकनीक और क्षमता निर्माण चाहिए। न्यायसंगत और अनुमानित जलवायु वित्त जरूरी है। बिना मदद के बड़े लक्ष्य हासिल नहीं हो सकते।

सहयोग की अपील

भारत ने सभी देशों से बहुपक्षवाद और पेरिस ढांचे को बचाने की अपील की। अगला दशक लक्ष्य नहीं, बल्कि कार्यान्वयन, लचीलापन, विश्वास और निष्पक्षता पर आधारित हो। भारत हर कदम पर सहयोग के लिए तैयार है।

संदेश साफ

भारत का संदेश स्पष्ट है कि जलवायु कार्रवाई सबकी साझा जिम्मेदारी है, लेकिन क्षमता के अनुसार। विकसित देश पहले कदम उठाएं, विकासशील देशों की मदद करें। तभी 1.5°C लक्ष्य हासिल होगा।

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