युद्ध के बाद भी 120 अरब डॉलर की जरूरत, Ukraine का बड़ा बयान

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कीव ने बड़ा बयान दिया है। यूक्रेन ने कहा है कि उसे अगले वर्ष कम से कम 120 अरब डॉलर की जरूरत होगी।

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नई दिल्ली: रूस के साथ चल रहे युद्ध के बीच यूक्रेन (Ukraine Russia War) ने कहा है कि उसे आने वाले वर्ष में अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए कम से कम 120 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी। शनिवार को यूक्रेनी नेतृत्व ने चेतावनी दी कि यदि पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिली तो देश को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

रक्षा पर सबसे बड़ा खर्च

वर्तमान में यूक्रेन अपने कुल आर्थिक उत्पादन का लगभग एक तिहाई हिस्सा केवल रक्षा (Defense Budget) पर खर्च कर रहा है। आर्थिक मोर्चे पर टिके रहने के लिए यह देश अपने पश्चिमी सहयोगियों की वित्तीय मदद पर निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध ने यूक्रेन की विकास दर और रोजमर्रा की जरूरतों को बुरी तरह प्रभावित किया है।

रक्षा मंत्री डेनिस शिमगल का बयान

कीव में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के रक्षा मंत्री डेनिस शिमगल (Denis Shmyhal) ने स्पष्ट किया कि यदि युद्ध के मैदान में रूस पर अधिक खर्च नहीं किया गया तो यूक्रेन को अपनी और भूमि खोने का खतरा है। उन्होंने कहा—“यदि संघर्ष जारी रहा तो हमें अगले वर्ष कम से कम 120 अरब डॉलर की जरूरत होगी।”

युद्ध समाप्त होने के बाद भी ज़रूरी होगा खर्च

डेनिस शिमगल (Denis Shmyhal) ने यह भी माना कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी सेना को मजबूत बनाए रखने और उसकी स्थिति को दुरुस्त रखने के लिए इतनी ही राशि आवश्यक होगी। उनका कहना था कि रूस किसी भी समय फिर से हमलावर हो सकता है, इसलिए सेना को सतर्क और सक्षम बनाए रखना बेहद अहम है।

रूसी संपत्तियों को जब्त करने का सुझाव

शिमगल ने पश्चिमी देशों में जमा रूसी संपत्तियों को जब्त करने का सुझाव भी दिया। उनका मानना है कि यही राशि यूक्रेन के रक्षा खर्च को पूरा करने में सहायक हो सकती है। उन्होंने बताया कि साढ़े तीन साल से अधिक समय से जारी इस युद्ध ने यूक्रेनी जनता पर कर का भारी बोझ डाल दिया है। ऐसे में विदेशी संपत्तियों का उपयोग एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर निर्भरता

यूक्रेन के बयान से यह स्पष्ट है कि युद्ध का भविष्य केवल मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक सहयोग पर भी निर्भर करेगा। पश्चिमी सहयोगी देशों की मदद के बिना यूक्रेन के लिए लंबे समय तक इस संघर्ष को झेल पाना मुश्किल है।

यूक्रेन की अपील से यह संकेत मिलता है कि युद्ध केवल सैन्य शक्ति का नहीं बल्कि आर्थिक स्थिरता का भी खेल बन चुका है। अब देखना होगा कि पश्चिमी देश इस अपील पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे यूक्रेन को उसके रक्षा खर्च के लिए अपेक्षित समर्थन प्रदान कर पाते हैं।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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