75 साल बाद भी इस मामले में भारत की बराबरी नहीं कर पाएंगे अमेरिका-चीन

प्यू रिसर्च सेंटर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2100 तक भारत की आबादी 1.5 अरब पर स्थिर रहेगी, जबकि चीन की तेज गिरावट से घटकर 63.3 करोड़ और अमेरिका की धीमी वृद्धि से 42.1 करोड़ हो जाएगी। इससे भारत वैश्विक जनसंख्या में अग्रणी बना रहेगा, जो अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति को प्रभावित करेगा।

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नई दिल्ली: पिछले 75 वर्षों में दुनिया की आबादी तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 8.2 अरब हो गई, लेकिन अब विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह रफ्तार धीमी पड़ेगी। प्यू रिसर्च सेंटर की 11 जुलाई को जारी रिपोर्ट, जो संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों पर आधारित है, बताती है कि 2100 तक वैश्विक जनसंख्या 10.3 अरब पर चरम छुएगी और फिर थोड़ी गिरकर 10.2 अरब रह जाएगी। यानी अगले 75 सालों में सिर्फ 1.9 अरब की बढ़ोतरी होगी। कम जन्म दर, बूढ़ी होती आबादी और प्रवास पैटर्न जैसे कारक इसके पीछे है, जिसमें विकास का केंद्र अब उप-सहारा अफ्रीका बन रहा है। भारत, चीन और अमेरिका जैसे शीर्ष तीन देशों की राहें अलग-अलग हैं, जो वैश्विक शक्ति संतुलन को नया आकार दे रही है।

भारत की जनसंख्या: चरम के बाद स्थिरता

भारत, जहां मौजूदा समय में करीब 1.5 अरब लोग रहते हैं, 2061 तक बढ़कर 1.7 अरब पर पहुंचेगा, फिर धीरे-धीरे घटकर 2100 तक वापस 1.5 अरब हो जाएगा। यह स्थिरता भारत को दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनाए रखेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की औसत आयु मात्र 28 वर्ष है, जो युवा श्रम बल के रूप में आर्थिक लाभ देगी। जन्म दर में कमी और बुजुर्ग आबादी के कारण गिरावट आएगी, लेकिन यह इतनी तेज नहीं होगी कि भारत का वर्चस्व प्रभावित हो। संसाधनों पर दबाव तो बढ़ेगा, लेकिन युवा ऊर्जा से नवाचार और विकास को बल मिलेगा।

चीन की आबादी: तेजी से सिकुड़न

इसके उलट, चीन में जनसंख्या पहले ही घटनी शुरू हो चुकी है, जो एक बच्चा नीति और शहरीकरण के कारण है। वर्तमान 1.4 अरब से 2100 तक यह घटकर मात्र 63.3 करोड़ रह जाएगी, यानी 70 करोड़ से ज्यादा की कमी। यह गिरावट श्रम शक्ति को कम करेगी और बुजुर्गों की देखभाल का बोझ बढ़ाएगी। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि जन्म दर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे होने से यह ट्रेंड तेज होगा, जिससे चीन की वैश्विक स्थिति कमजोर पड़ सकती है।

अमेरिका की आबादी: धीमी लेकिन सकारात्मक वृद्धि

अमेरिका प्रमुख शक्तियों में एकमात्र ऐसा देश है जहां जनसंख्या लगातार बढ़ेगी। वर्तमान 37.1 करोड़ से 2100 तक यह 42.1 करोड़ हो जाएगी, मुख्यतः प्रवास और अपेक्षाकृत ऊंची जन्म दर से। औसत आयु 39 वर्ष होने के बावजूद युवा प्रवासियों से विस्तार बरकरार रहेगा। हालांकि, यह वृद्धि इतनी नहीं होगी कि भारत या यहां तक कि घटते चीन से आगे निकले। प्यू रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिरता अमेरिका को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखेगी, लेकिन आंकड़ों में एशियाई दिग्गजों से पीछे रहेगा।

अगले 75 वर्षों के निहितार्थ

ये अनुमान भारत को अपराजेय जनसंख्या नेता के रूप में चित्रित करते हैं, जहां चीन आधी हो जाएगा और अमेरिका भी दोगुना नहीं पहुंच पाएगा। 2100 तक भारत के 1.5 अरब के मुकाबले चीन के 63.3 करोड़ और अमेरिका के 42.1 करोड़ से भारत को भू-राजनीति, उपभोक्ता बाजार और श्रम में बढ़त मिलेगी। रिपोर्ट नीति निर्माताओं को चेताती है कि संसाधन दबाव और उम्रदराजी चुनौतियां हैं, लेकिन भारत की जनसांख्यिकीय मजबूती वैश्विक नेतृत्व को फिर से परिभाषित कर सकती है। दुनिया बूढ़ी हो रही है, ऐसे में ये बदलाव समझना जरूरी है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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