नई दिल्ली: संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह मुद्दा केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक हथियार बन चुका है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है, हालांकि ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
यह विरोधाभास दिखाता है कि दोनों देश इस मुद्दे का इस्तेमाल न केवल परमाणु नीति, बल्कि वैश्विक संदेश देने के लिए भी कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाली वार्ताओं की दिशा काफी हद तक इसी मुद्दे पर निर्भर करेगी।
क्या होता है संवर्धित यूरेनियम?
यूरेनियम प्राकृतिक रूप में सीधे उपयोगी नहीं होता। इसमें यूरेनियम-235 नामक एक विशेष समस्थानिक की मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया को संवर्धन (Enrichment) कहा जाता है। प्राकृतिक यूरेनियम में यू-235 की मात्रा लगभग 0.7% होती है, जिसे बढ़ाकर उपयोगी बनाया जाता है। करीब 3–5% तक संवर्धित यूरेनियम का उपयोग परमाणु बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। लेकिन जब यह स्तर 20% से ऊपर चला जाता है, तो इसे उच्च संवर्धित यूरेनियम माना जाता है। वहीं 90% तक पहुंचने पर यह परमाणु हथियार बनाने योग्य हो जाता है।
परमाणु हथियार के लिए कितना यूरेनियम चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक परमाणु बम बनाने के लिए लगभग 25 किलोग्राम 90% संवर्धित यूरेनियम पर्याप्त माना जाता है। इसके अलावा, करीब 40–42 किलोग्राम 60% संवर्धित यूरेनियम को आगे प्रोसेस कर हथियार-ग्रेड स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 60% से 90% तक पहुंचने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज होती है, क्योंकि इस स्तर तक पहुंचने में अधिकांश तकनीकी काम पहले ही पूरा हो चुका होता है।
ईरान के पास कितना भंडार?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अन्य स्रोतों के अनुसार, ईरान के पास लगभग 400–450 किलोग्राम 60% तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। इसके अलावा, उसके पास कम संवर्धन स्तर (20% से नीचे) का भी बड़ा भंडार है, जिसे जरूरत पड़ने पर आगे संवर्धित किया जा सकता है।
इस स्थिति में, यदि ईरान चाहे तो अपेक्षाकृत कम समय में कई परमाणु हथियारों के लिए आवश्यक सामग्री तैयार कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय निगरानी सीमित होने के कारण इन आंकड़ों की पूरी तरह पुष्टि करना मुश्किल है।
क्यों बढ़ी वैश्विक चिंता?
संवर्धित यूरेनियम को लेकर विवाद केवल मात्रा या प्रतिशत का नहीं, बल्कि इरादों और भरोसे का है। अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान का बढ़ता भंडार “ब्रेकआउट टाइम” को कम करता है—यानी वह समय, जिसमें कोई देश हथियार-ग्रेड सामग्री तैयार कर सकता है।
वहीं ईरान के लिए यह भंडार एक रणनीतिक दबाव का साधन है, जिसके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। संवर्धित यूरेनियम आज वैश्विक राजनीति का एक अहम केंद्र बन चुका है। यह केवल वैज्ञानिक या तकनीकी विषय नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सुरक्षा और शक्ति संतुलन का सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ताएं इस बात को तय करेंगी कि यह तनाव कम होगा या और गहराएगा



